संजीवनी टुडे

लखनपुर टोल टैक्स आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ : एचआरएके

संजीवनी टुडे 16-06-2019 17:53:51

होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशन, कटरा (एचआरएके) और होटल, बार एंड रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ पत्नीटॉप (एचबीआरएपी) की एक संयुक्त बैठक रविवार को यहां अध्यक्ष राकेश वजीर, चेयरमैन श्याम लाल केसर और एचबीआरएपी


कटरा। होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशन, कटरा (एचआरएके) और होटल, बार एंड रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ पत्नीटॉप (एचबीआरएपी) की एक संयुक्त बैठक रविवार को यहां अध्यक्ष राकेश वजीर, चेयरमैन श्याम लाल केसर और एचबीआरएपी के अध्यक्ष कुशल मंगोत्रा की अध्यक्षता में हुई। इसमें यह संकल्प किया गया कि लखनपुर में टोल टैक्स लगाने का डटकर विरोध किया जायेगा और सरकार को सूचित किया जाएगा कि वो टोल टैक्स लेकर एक राष्ट्र एक कर की अपनी नीति के खिलाफ जा रही है। इस टैक्स को अवैध बताते हुए इसे आम आदमी पर बोझ भी बताया गया।

इस दौरान वजीर ने कहा कि यह वास्तव में आश्चर्य की बात है कि सरकार जैसी संस्था अपने स्वयं के रुख से पीछे हट रही है और याद दिलाया कि जब हमारे राज्य में जीएसटी लागू किया गया था तो इसके खिलाफ काफी आक्रोश था क्योंकि अधिकांश सैक्टरों पर कोई कर नहीं था। उस समय लोगों को आश्वासन दिया गया था कि जीएसटी के आने पर कोई अन्य कर नहीं लगेगा और लखनपुर में करों की वसूली बंद हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि उसके बाद लंबी अवधि के गुजरने के बावजूद और यहां तक कि जीएसटी लागू होने के बाद भी टोल टैक्स चल रहा है और राज्य के प्रत्येक व्यक्ति को टोल के नाम पर एक अतिरिक्त कर का भुगतान करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आम व्यक्ति को राज्य के बाहर से आने वाली प्रत्येक वस्तु पर दोहरे कर का भुगतान करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि हमारा राज्य अधिकतर बाहर से आने वाली चीजों पर निर्भर करता है, इसलिए एक आम व्यक्ति को यह भी पता नहीं चलता है कि वह ज्यादातर वस्तुओं के लिए डबल टैक्स चुका रहा है। इसका उदाहरण सीमेंट है, जिसके एक बैग पर 50 रुपये का कर वसूला जा रहा है, जो कि जीएसटी के अतिरिक्त है और अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है और यही स्थिति अन्य वस्तुओं के साथ भी है और अत्यधिक आपत्तिजनक है।

वहीं, इस दौरान केसर ने कहा कि यदि सरकार टोल टैक्स लेने के लिए उत्सुक है तो उसे जीएसटी को दूर करना चाहिए क्योंकि सरकार एक राष्ट्र एक कर की अपनी नीति के खिलाफ नहीं जा सकती है, जो पूरे भारत में लागू है और जम्मू-कश्मीर इस मामले में एकमात्र अपवाद है जहां लोग जीएसटी का भुगतान कर रहे हैं और साथ ही साथ टोल टैक्स भी दे रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर उद्योग के लोगों को कुछ चिंताएं हैं तो सरकार को उनके साथ बैठना चाहिए और उसके अनुसार चीजों का निपटान करें लेकिन पूरे राज्य को प्रभावित नहीं होने देना चाहिए।

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