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विशेष : मानसून आते ही दिखने लगा डेंगू का प्रकोप, प्रशासन निष्क्रिय

संजीवनी टुडे 01-07-2019 17:30:50

मानसून आते ही दिखने लगा डेंगू का प्रकोप


कोलकाता। पश्चिम बंगाल में गत 21 जून को ही मानसून प्रवेश कर चुका है। इसके साथ ही राज्य भर में बारिश की भी शुरुआत हो गई है। एक तरफ लोगों को गर्मी से राहत मिली है तो दूसरी ओर डेंगू जैसी संक्रामक बीमारियां अपना असर दिखाने लगी हैं। अब तक अशोकनगर और हावड़ा में डेंगू  से दो लोगों की मौत हो चुकी है। कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में करीब 10 से अधिक लोग डेंगू से पीड़ित होकर विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। बावजूद इसके राज्य के किसी भी हिस्से में डेंगू रोकथाम के लिए नगर निगम प्रशासन की किसी तरह की कोई सक्रियता नहीं दिख रही है।

इस बारे में प्रतिक्रिया के लिए जब सोमवार को कोलकाता के मेयर और राज्य के शहरी तथा नगर पालिका विकास मंत्री फिरहाद हकीम से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि ऐसी बात नहीं है कि नगर निगम अथवा नगर पालिका प्रशासन निष्क्रिय बना हुआ है। इसके लिए पहले ही निर्देशिका जारी की गई है और हर जगह काम हो रहा है। लोगों को डेंगू रोकथाम के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है और नगरपालिका भी अपनी ओर से पूरी व्यवस्था करने में जुटी है। उन्होंने कहा कि अभी मानसून शुरू हुआ है। नगरपालिका कर्मी प्रत्येक क्षेत्र में सक्रिय है और कहीं भी पानी नहीं जमे इसकी व्यवस्था में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि डेंगू रोकथाम हमारी पहली प्राथमिकता है।

राज्य स्वास्थ्य विभाग सूत्रों के हवाले से खबर है कि मानसून के पूर्व ही राज्यव्यापी अभियान चलाने का निर्देश नगर निगम और नगर पालिकाओं को दिया गया है। सभी क्षेत्रों में घूम घूमकर डेंगू रोकथाम के लिए जागरूकता फैलाने के साथ -साथ पीड़ितों की सूची तैयार करने को कहा गया था। लेकिन मानसून के 10 दिन से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी इस बारे में कोई पुख्ता रिपोर्ट अभी तक स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिली है। 

साल 2017 में पश्चिम बंगाल में डेंगू से मरने वालों की संख्या सबसे अधिक थी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इस दौरान कोलकाता, साल्टलेक, बैरकपुर, हुगली, हावड़ा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना इलाके में प्रति लाख जनसंख्या में से करीब करीब 100 लोग डेंगू से पीड़ित हुए थे। डेढ़ सौ से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद वर्ष 2018 में भी करीब-करीब 80 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने राज्य भर की 127 नगर पालिकाओं के 2976 वार्ड में 15180 टीम तैयार की थी जिसका काम डेंगू रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक और आवश्यक व्यवस्था करना था। प्रति वर्ष जनवरी महीने में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डेंगू रोकथाम के लिए बैठक करने की शुरुआत की है इसके बावजूद जून महीना खत्म हो गया लेकिन नगर पालिकाओं की कुछ खास सक्रियता राज्य भर में नहीं दिख रही।

 स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया है कि राज्य भर में सबसे अधिक डेंगू का प्रकोप जुलाई महीने में फैलता है। नवंबर महीने तक इसका असर रहता है और लोगों की मौत होती रहती है। नगर पालिका कर्मियों को निर्देश दिया गया है कि जून महीने की शुरुआत से ही घर-घर जाकर बुखार से पीड़ित लोगों की सूची बनाना और उसकी रिपोर्ट राज्य स्वास्थ्य विभाग को भेजना होगा। प्रत्येक क्षेत्र में जागरूकता का कार्यक्रम चलाने का निर्देश में दिया गया है लेकिन जून महीना पूरा बीत गया पर राज्य के किसी भी हिस्से से अभी तक रिपोर्ट नहीं मिली है।

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