संजीवनी टुडे

किशोर दा को श्रद्धांजलि व स्वरांजलि देने, देश भर से किशोर प्रसंशक पहुंचे खंडवा

यूनीवार्ता- इनपुट

संजीवनी टुडे 13-10-2019 21:32:46

मध्यप्रदेश के खंडवा में आज देश भर से किशोर दा के फेन्स उनकी पुण्यतिथि पर अपनी श्रद्धांजलि देने समाधि स्थल पर पहुंचे और उन्हें स्वरांजलि भी दी।


खण्डवा। मध्यप्रदेश के खंडवा में आज देश भर से किशोर दा के फेन्स उनकी पुण्यतिथि पर अपनी श्रद्धांजलि देने समाधि स्थल पर पहुंचे और उन्हें स्वरांजलि भी दी।

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मध्यप्रदेश सरकार आज उनके सम्मान में देश के जाने-माने फिल्म निर्देशक प्रियदर्शन को किशोर कुमार अलंकरण देने जा रही है। वही उनके प्रशंसक किशोर दा को भारत रत्न देने की मांग कर रहे है। देश भर के संगीत प्रेमियों का कुम्भ भरा है।

किशोर दा के गीत लगातार 34 घंटे गाने का रिकार्ड बनाने के लिए एक अलग आयोजन चल रहा है जो कल सुबह यहाँ किशोर दा के पैतृक घर के समीप ही गाँधी भवन में शुरू हुआ। सौ से ज्यादा कलाकार इसमें हिस्सा ले रहे है और गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रेकॉर्ड में इसे दर्ज़ करने के लिए कम्पनी के अधिकारी भी यहाँ पहुंचे है।

इंदौर के केकेसी क्लब के अध्यक्ष दीपक पाठक ने बताया कि पहले इंदौर में लगातार 32 घण्टे फिर दूसरे वर्ष 33 घण्टे गाने का रेकॉर्ड बनाया अब अपने ही इस रेकॉर्ड को तोड़ने के लिए 34 घंटे लगातार गाने का रेकॉर्ड खण्डवा में बनाया जा रहा है।

किशोर प्रशंसक गुजरात के द्वारकादास सोनी कहते है कि मैं पिछले 32 वर्षो में 63 बार यहाँ आ चुका हूँ। किसी मेग्नेटिक पॉवर की तरह यह जगह मुझे खींचती है और अपने आप यहाँ खिंचा चला आता हूँ। किशोर कुमार के नाम पर मैं देश भर में कार्यक्रम करता हूँ ,वे मेरे लिए देवाधिदेव है। वैष्णव धर्म में जैसे 84 वैष्णव है वैसे किशोर दा मेरे लिए 85 वे वैष्णव है।

महाराष्ट्र के भुसावल के कलाकार सचिन कामले कहते है कि किशोर दा की समाधि पर आकर लग रहा जैसे साक्षात् किशोर दा से मिल रहा हूँ ,उनका आशीर्वाद मुझे मिल रहा है जाओ खूब आगे बढ़ो ,नाम कमाओ... किशोर दा को इस दुनिया से रुखसत हुए 32 वर्ष हो गए उनके निधन के बाद पैदा हुई नई पीढ़ी भी उन्हें गुनगुनाती है,उनकी फैन है।

संगीत और कला की दुनिया में खण्डवा को वैश्विक पहचान ही किशोर कुमार से मिली है। वे जहाँ भी अपने कार्यक्रम करते उसमे खण्डवा का जिक्र करना कभी नहीं भूलते। यहाँ तक की अपनी फिल्मो के कई पात्र भी वे खण्डवा के लोगो के नाम पर गढ़ते ,उसमे भी कहीं खण्डवा का जिक्र ले आते। दरअसल अपनी माटी से उन्हें काफी गहरा लगाव था यही वजह थी कि उन्हें मुम्बई ने काफ़ी शोहरत और पैसा दिया लेकिन उन्हें सुकून खण्डवा में ही मिलता। उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा भी खण्डवा की माटी में ही मिलने की व्यक्त की थी और उसे पूरा भी किया गया।

मध्यप्रदेश सरकार ने किशोर दा के सम्मान में वर्ष 1997 -98 से राष्ट्रिय किशोर कुमार सम्मान " की परंपरा शुरू की जिसमे गायन ,फिल्म निर्देशन ,अभिनय और पटकथा लेखन जैसी तमाम विधाओं में श्रेष्ठतम कार्य करने वाले व्यक्तियों को यह अलंकरण दिया गया। ऋषिकेश मुखर्जी ,गुलज़ार ,अमिताभ बच्चन ,देव आनंद ,यश चोपड़ा सहित अब तक 20 कलाकारों को यह सम्मान दिया जा चुका है। इस बार का सम्मान फिल्म निर्देशक प्रियदर्शन को समारोह पूर्वक दिया जा रहा है।

मध्यप्रेदश शासन की संस्कृति मंत्री डॉ विजयलक्ष्मी साधौ ने कहा कि पहले जब मैं संस्कृति मंत्री थी तभी यह किशोर अलंकरण शुरू हुआ था और आज मुझे ख़ुशी है कि आज फिर संस्कृति मंत्री के रूप में मैं ही यह सम्मान देने आई हूँ। यह दो साल का सम्मान है ,पिछली सरकार ने यह सम्मान नहीं दिया था तो पिछले साल का सम्मान हम प्रियदर्शनजी को देने जा रहे है और इस वर्ष का सम्मान वहीदा रहमान जी को देना तय हुआ है। 

वहीदा रहमान जी बहुत बड़ी कलाकार है ज्यूरी ने उनके कृतित्व को देखते हुए उनका नाम तय किया है चूँकि वहीदा रहमान जी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है इसलिए इतनी लम्बी यात्रा उनके लिए संभव नहीं है। किशोर दा के नाम का सम्मान वहीदा जी को दिया जा रहा है यह हम सबके लिए भी सम्मान की बात है।

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