संजीवनी टुडे

बेटे के कांग्रेस में शामिल होने पर खंडूरी ने दूसरे दिन तोड़ी चुप्पी, कहा युवाओं को मिले मौका

संजीवनी टुडे 17-03-2019 15:09:03


देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी ने अपने बेटे मनीष खंडूरी के कांग्रेस का दामन थामने के दूसरे दिन अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को आगे आना चाहिए और उनक बेटा यदि भाजपा में आता तो परिवार वाद का आरोप लगता। उसे अपना रास्ता चुनने की स्वतंत्रता है। 

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हालांकि भुवन चंद्र खंडूरी भाजपा के वरिष्ठतम नेताओं में शामिल हैं जो दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तथा केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हैं। वर्ष 2012 में तो एक बार उत्तराखंड में नारा लग गया था कि खंडूरी ही जरूरी लेकिन आज इस नारे की हवा निकल गई है। जिस ढंग से मनीष खंडूरी ने कांग्रेस की सदस्यता ली वह इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं भुवन चंद्र खंडूरी का मानस ठीक नहीं है। 

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में खंडूरी सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रह चुके हैं। उनकी स्वच्छ छवि के कारण मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी को बीते साल सितंबर में रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। 

हालांकि बाद में उन्हें इस पद से हटा दिया गया। उनके स्थान पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री कलराज मिश्र को समिति का अध्यक्ष बनाया गया। इसका कारण बताया गया कि नरेंद्र मोदी के कैबिनेट नियम के तहत 75 साल से अधिक उम्र वाले केन्द्रीय मंत्री या लोकसेवकों को पद नहीं दिया जाता।

भुवन चंद्र खंडूरी की छवि ईमानदार नेताओं में रही है लेकिन इनके कई सहयोगियों तथा पत्नी पर लगातार उंगलियां उठती रही हैं। इनके सहयोगियों में भाजपा के वरिष्ठ नेता उमेश अग्रवाल तथा अरुण गुप्ता जैसे नाम शामिल थे, जिनकी छवि कुछ लोगों ने अच्छी नहीं मानी। 

वैसे भी भारत की रक्षा तैयारियों को लेकर मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के नेतृत्व वाली स्थायी समिति की ओर से लगातार आलोचनात्मक रिपोर्ट आती रही है। मार्च 2018 में ये रिपोर्ट संसद के पटल पर रखी गई थी, जिसमें रक्षा स्टॉक की कमी के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया था। रिपोर्ट में ये भी कहा गया था कि भारतीय सुरक्षा बलों के पास 68 फीसदी हथियार बेहद पुराने हैं। यह रिपोर्ट अर्द्धसत्य है। 

उत्तराखंड में 2007 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जीत हासिल हुई थी। मुख्यमंत्री पद के लिए भारी खींचतान और विरोध के बीच खंडूरी मुख्यमंत्री बनाए गए, लेकिन निशंक और कोश्यारी गुट ने हथियार नहीं डाले। साल 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में जब कांग्रेस ने राज्य की पांचों सीटों पर कब्जा कर लिया और बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी तो खंडूरी के खिलाफ रही लॉबी को हाथों-हाथ मुद्दा मिल गया।

इस बीच 2009 में खंडूरी को हटाकर निशंक को सीएम बनाया गया, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते निशंक को 2011 में मुख्यमंत्री पद बीच में ही छोड़ना पड़ा। भले ही खंडूरी को दोबारा मुख्यमंत्री बनाया गया लेकिन कुछ अच्छा नहीं हुआ और इन्होंने तमाम वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को राजनीतिक रूप से उत्पीड़ित किया। वर्ष 2012 में उनके नाम पर चुनाव लड़ा गया और बीजेपी बुरी तरह हारी।

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आज भले ही उनका स्वास्थ्य खराब है लेकिन ईमानदारी के स्तर को छोड़कर ऐसा कुछ नहीं है जो जनता के लिए महत्वपूर्ण हो। सैनिक वेल्फेयर एसोसिएशन का भाजपा को पूर्ण समर्थन दिया जाना इस बात का संकेत है कि फौजी भाजपा के साथ हैं और जिसे भी पौड़ी से टिकट मिलेगा उसे इसका लाभ मिलेगा। 

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