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कठुआ: ग्रामीण संघर्ष समिति ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले लोगों की समस्याओं पर की चर्चा

संजीवनी टुडे 27-09-2020 16:42:35

हीरानगर की ग्रामीण संघर्ष समिति द्वारा एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया जिसमें अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले लोगों की समस्याओं पर चर्चा की गई।


कठुआ। हीरानगर की ग्रामीण संघर्ष समिति द्वारा एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया जिसमें अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले लोगों की समस्याओं पर चर्चा की गई। 

रविवार को कठुआ में ग्रामीण संघर्ष समिति के संयोजक ठाकुर रंजीत सिंह की अध्यक्षता में एक बैठक की गई जिसमें जिला कठुआ के हीरानगर की अंतर्राष्ट्रीय सीमा से अखनूर तक सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों को उनका हक दिलाने पर चर्चा की गई। पत्रकारों को संबोधित करते हुए संयोजक ठाकुर रणजीत सिंह ने बताया कि 1947 से लेकर 1996 तक जिला कठुआ के अधीन पड़ते सीमा क्षेत्र की अधिकतर भूमि उस समय की केंद्र सरकार ने सेना और शस्त्र बलों को दी थी जिस पर भारतीय सेना ने बंकर बनाए थे और कई कनाल भूमि पर सेना का कब्जा था। 

उस समय की सरकार ने ना तो अधिग्रहण अधिनियम के तहत उन लोगों की भूमि का अधिग्रहण किया और ना ही सीमा क्षेत्र के लोगों को उसका कोई मुआवजा दिया। इसी समस्या को लेकर सीमा क्षेत्र के लोग पिछले कुछ महीनों से केंद्र सरकार और जम्मू कश्मीर यूटी सरकार के समक्ष अपनी मांगों को रख रहे हैं। उन्होंने बताया कि सीमा क्षेत्र में ज्यादातर लोग खेतीवाड़ी पर ही निर्भर हैं जबकि उनकी जमीनों पर सेना द्वारा बकरों का निर्माण हुआ है, जिसके चलते क्षेत्र के लोगों को भोजन और अन्य वित्तीय संकट के लिए बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। 

वही ग्रामीण संघर्ष समिति सीमा क्षेत्र के सदस्य अशोक जसरोटिया ने बताया के सीमा क्षेत्र पहाड़पुर से लेकर मावा तक हजारों कनाल भूमि संचाई के बिना ही बची हुई है। जिस पर सिंचाई के लिए पानी का कोई भी उचित प्रबंध नहीं है। इसी को हल करने के लिए ग्रामीण संघर्ष समिति ने जम्मू-कश्मीर यूटी सरकार के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मांग की है कि इन क्षेत्रों में दो छोटी नाले पड़ते हैं जिन्हें तरनाह और बेइ नाला कहा जाता है। यदि इन दोनों नालों का पानी एकत्रित कर उस पर चेक डैम का निर्माण किया जाए तो उससे सिंचाई के लिए पानी की अपूर्ति की जा सकती है। जिससे सीमा क्षेत्र में सिंचाई की समस्या का भी हल होगा और क्षेत्र के लोगों को रोजगार भी मिलेगा। 

उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आत्मनिर्भर भारत की बात कर रहे हैं। उनका सपना भी तभी पूरा होगा जब इस प्रकार की योजनाएं सीमा क्षेत्र में लाई जाऐंगी जिससे आत्मनिर्भर भारत के तहत लोगों को रोजगार मिलेगा और खेतों में सिंचाई के भी उचित साधन बनेगा। वहीं जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल से मांग की है की चेक डैम की परियोजना तैयार की जाए और इन छोटे छोटे नालों का पानी इकट्ठा करके जरूरतमंद किसानों को पानी की आपूर्ति की जाए। इस बैठक के दौरान अशोक जसरोटिया, बिशन दास, अनिल सिंह, सुभाष शर्मा और प्रह्लाद सिंह मौजूद रहे।

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