संजीवनी टुडे

काला घोड़ा महोत्सव: मुम्बईवासियों को मोह रही है आदिवासियों की पारंपरिक चित्र प्रदर्शनी

संजीवनी टुडे 09-02-2019 15:13:50


मुंबई। दक्षिण मुंबई में चल रहा काला घोड़ा महोत्सव शहर के हरवर्ग को आकर्षित कर रहा है । महोत्सव में आदिवासियों की पारंपरिक चित्र प्रदर्शनी आगंतुकों का मन मोह रही है। आदिवासी कलाकारों की ओर से बनाए गए ढ़ोल , तबला चर्चगेट के आस पास युवा पीढ़ी बजा कर आनंदित होते आसानी से देखी जा रही है। आदिवासी विकास विभाग ने आदिवासी कलाकारों की कलाकृतियों को लोगों के सामने लाने के लिए पहल की है। आदिवासी भाइयों द्वारा निर्मित सामान और चित्रों की प्रदर्शनी के स्टॉल उत्सव में लगाये गये हैं। 

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उल्लेखनीय है कि मुंबई में 2 फरवरी से 10 फरवरी तक चर्चगेट के पास ओवल मैदान में काला घोड़ा महोत्सव मनाया जाता है। मुंबई वासियों को तनावभरे जीवन से उबारने के लिए 1998 से कालाघोड़ा महोत्सव असोसिएशन की ओर से शुरु किया गया यह महोत्सव कारगर साबित हो रहा है। इस बार यहां आदिवासियों जीवन पर आधारित चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई है,जो मुंबईवासियों को आकर्षित कर रही है। कहा जाता है कि हर तस्वीर के पीछे कोई न कोई कहानी होती है, अगर तस्वीर इंसान की जिंदगी से जुड़ी हो, तो मन को ज्यादा अच्छी लगती हैं। इस प्रदर्शनी में चित्रों के बारे में भी ऐसा ही है। 

आदिवासियों के जीवन, प्रकृति के महत्व, होली त्योहार, मानव के जन्म से लेकर मृत्यु तक की कहानियों पर आधारित वारली चित्र काला घोड़ा महोत्सव में विशेष आकर्षण के केंद्र बन गये हैं । पालघर जिले के आदिवासियों द्वारा बनाई गई तस्वीरें, वारली नक्काशी की गयीं काँच की बोतलें, लकड़ी से बने सजावटी सामान, चिडिय़ों के घोंसले, सूखे भोपले पर वारली चित्रकारी , वारली नक्काशी की लकड़ी की थालियां, और जालीदार कपड़े पर लाल मिट्टी की कलाकारी, कोयले और राख का उपयोग करके सूखे वारली चित्र। ऐसे विभिन्न उत्पादन महोत्सव में नागरिकों के लिए आकर्षण हैं । आयुष संगठन की मदद से आदिवासी भाइयों की कला के माध्यम से उनकी अलग पहचान बनाने के उद्देश्य से इस उत्सव में दो कक्ष बनाये गए हैं। पांच सौ से लेकर 25 हजार रुपये तक के इस प्रदर्शनी में वारली नक्काशी की पेंटिंग मौजूद हैं। 

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प्रदर्शनी में जव्हारा, मोखाडा के आदिवासियों द्वारा तैयार किये गये उत्पादन बिक्री के लिए प्रदर्शनी में रखे गये हैं । अद्भुत लगने वाली इन तस्वीरों की विदेशों में भी भारी मांग है। इन आदिवासी कलाकारों द्वारा बनाई गई वारली पेंटिंग को जापान, पेरिस में प्रदर्शित करने की मांग की जाती है। दहाणू, बोईसर, पालघर और विक्रमगढ़ के आदिवासी कलाकारों की पारंपरिक कला को काला घोड़ा महोत्सव में सम्माजनक स्थान प्राप्त हुआ है। कुल मिलाकर यह महोत्सव आदिवासी भाईयों के लिए मुंबई वासियों को आनंदित करने के साथ ही उनकी कमाई का जरिया भी साबित हो रहा है। राज्य के आदिवासी मंत्री विष्णू सावरा ने मुंबई वासियों को इस महोत्सव में शामिल होकर आदिवासी समाज के कलाकारों का उत्साहवद्र्धन की अपील की है। 

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