संजीवनी टुडे

दिल्ली की पत्रकारिता ईमेल की पत्रकारिता:आशुतोष शुक्ल

संजीवनी टुडे 19-05-2019 22:28:50


लखनऊ। लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय के कलाम सेंटर में रविवार को देवर्षि नारद जयंती मनाई गई। देवर्षि नारद जयंती आयोजन समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों पत्रकारों ने नारदीय पत्रकारिता के मार्ग चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विवि के कुलपति एमएलबी भट्ट ने की। मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ल ने कहा कि अध्ययन व परिश्रम के शौकीन हैं तो पत्रकारिता में आइए। यहां चुनौती सबसे ज्यादा है। पत्रकारिता धर्म पर चर्चा करते हुए कहा कि आज के दौर में प्रश्न है कि पत्रकारिता लोक से कितना कनेक्ट है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की पत्रकारिता ईमेल की पत्रकारिता है। वास्तविक पत्रकारिता गांवों में कवरेज करने वाला रिपोर्टर कर रहा है। वहीं, चैनलों पर होने वाले डिवेट को समाज के लिए हानिकारक बताया।

नारदीय पत्रकारिता पर बोलते हुए श्री शुक्ल ने कहा कि नारद हमेशा घूमते रहते थे। यानी मौके पर जाते थे। लेकिन आज पत्रकार मोबाइल पर आश्रित हो गया है। जिसके कारण खबरों की विश्वसनीयता पर संकट मंडरा रहा है। शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्ष में सरकार ने कोई काम नहीं किया। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के कारण हम आज आक्रांताओं का सम्मान करने लगे हैं। शुक्ल ने कहा कि पत्रकारिता:आस्था, विश्वास व भरोसे पर चलेगा। दुर्भाग्य है कि आज हमारी शिक्षा व्यवस्था जैसी होनी चाहिए वैसी नहीं है। हम आक्रांता का सम्मान करने लगे और अपने को नीचा समझने लगे। सनातन संस्कृति को जब भी कोई असहिष्णु कहे तनकर खड़े हो जाइए। बताया कि पत्रकारिता व समाज की साक्षा चुनौती शै​क्षणिक पाठ्यक्रम है, जिसमें बदलाव की जरूरत है। कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस के संरक्षण में कम्यूनिस्टों ने गिरोह बनाकर शासन किया। 

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मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के क्षेत्र प्रचार प्रमुख कृपाशंकर ने कहा कि पत्रकार जान हथेली पर रखकर खबर लाता है। यहां पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारों को चिंतन करना चाहिए कि क्या वे अच्छी खबरें दे सकते हैं। इस मौके पर संघ पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि संघ के कार्य पद्धति में बदलाव हुए हैं, लेकिन लक्ष्य नहीं बदला। वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र भदौरिया ने कहा कि आत्मविस्मृति भयानक रोग है। हम अपने पूर्वजों को भूलते जा रहे हैं। नारद ज्ञान का विपुल भण्डार व त्रिकालदर्शी थे। नारद तत्ववेत्ता व साहित्य के प्रथम रचयिता थे। वे वेदों के मंत्रद्रष्टा थे। राक्षस व देवता दोनों के बीच उनका सम्मान रहा। उनकी सूचनाएं विश्वसनीय रहती थीं। वह आद्य पत्रकार थे। इस मौके पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारिता कोर्स में देवर्षि नारद को जोड़ा जाना चाहिए।

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