संजीवनी टुडे

छत बनाने की हर कोशिश हुई नाकाम, खुले प्रांगण में विराजमान हैं झारखंडी महादेव

संजीवनी टुडे 17-07-2019 14:43:30

। इस पवित्र माह में भगवान शिव की भक्तों पर विशेष कृपा रहती है।


गोरखपुर। हिन्दू धर्म में सावन माह का विशेष महत्व है। इस पवित्र माह में भगवान शिव की भक्तों पर विशेष कृपा रहती है। गोरखपुर जनपद में कई प्राचीन मंदिर हैं, जिनमें से एक झारखण्डी का महादेव मंदिर है। यह मंदिर हिन्दुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। सावन शुरू होने पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है।

सैकड़ों वर्ष पुराना यह मंदिर रामग्राम क्षेत्र के सरया तिवारी गांव में आता है। मंदिर के मुख्य पुजारी शम्भू गिरी गोसाई ने बताया कि प्राचीन समय में यह क्षेत्र जंगल से आच्छादित था। एक लकड़हारा जब पेड़ काट रहा था, तभी अचानक कुल्हाड़ी किसी चट्टान से टकराई, दोबारा जब उसने प्रहार किया तो चट्टान से रक्त प्रवाहित होने लगा। यह देखकर वह परेशान हो गया और भागते हुए गांव पहुंचा। 

उसने ग्रामीणों से सारी बात बतायी। इसके बाद ग्रामीण उस जगह पहुंचे और रक्त निकलने वाले स्थान की सफाई की । सफाई के बाद वहां उन्हें काले रंग का एक शिवलिंग दिखा, जो धीरे-धीरे नीचे होता चला गया। जो दूध भरने से ऊपर आया। इसी के बाद यहां पूजा होने लगी। मुख्य द्वार पर नंदी की एक बड़ी मूर्ति है। ऐसा प्रतीत होता कि नंदी इस स्थान का पहरा दे रहे हों।

इस मंदिर की सबसे पहली खासियत है कि शिवलिंग के ऊपर कोई छत नहीं है। ऐसा नहीं है कि इस यहां छत बनाने की कोशिश नहीं की गयी। हर बार कोशिश करने पर भी कभी छत नहीं बन पायी। आज झारखंडी महादेव शिवलिंग खुले प्रांगण में ही स्थित है। 

प्राचीन वृक्ष पर पंचमुखी शेषनाग की आकृति बेहद निकली है, जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र है। नाग देव के रूप में इनकी विधिवत पूजा भी की जाती है। मुख्य पुजारी ने बताया कि यहां जहरीले जीवों का भी वास है। इनमें सांप, गोजर, बिच्छू विशेष रूप से हैं। यहां चोटी वाले सांप की एक विशेष प्रजाति पायी जाती है। जो संख्या में अब बहुत कम हो गये हैं। कभी-कभी नाग शिवलिंग में आकर भी लिपट जाते हैं।

गौतम बुद्ध ने किया था विश्राम
ऐसी मान्यता है कि कुशीनगर जाते समय भगवान बुद्ध यहां दो दिनों तक रुके थे। उन्होंने इस प्राचीन वृक्ष के नीचे अपना समय बिताया था। यह भी कहा जाता है कि भगवान बुद्ध की पत्नी यशोधरा और उनके परिजन भी यहां पूजा करते थे।

कड़ी तपस्या के बाद यहां टिके पुजारी
मुख्य पुजारी ने बताया कि लाल बिहारी दास से पहले यहां कोई भी पुजारी टिक नहीं पाता था। उन्होंने एक पांव पर खड़े रहकर काफी दिनों तक तपस्या की, तब जाकर भोले बाबा प्रसन्न हुए और यहां महंत और पुजारियों का टिकना शुरू हुआ।

हर मनोकामना यहां होती है पूरी
मुख्य पुजारी ने बताया कि दूर-दूर से सैकड़ों की संख्या में भक्त यहां अपनी मुराद लेकर आते हैं और बाबा भोलेनाथ उनकी मनोकामना पूरी करते हैं। स्थानीय निवासी मुकेश कुमार जायसवाल ने बताया कि सावन माह के अतिरिक्त भी वे इस मंदिर में हमेशा आते हैं। अब तक उनकी सारी मुरादे पूरी हुई है। स्थानीय निवासी प्रीति की भी बाबा भोले नाथ में विशेष श्रद्धा है। वह हमेशा यहां आती हैं। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों के अलावा भी दूर-दूर से लोग यहां आते हैं और उनकी मनोकामना भी पूरी होती है। इस तरह यह प्रसिद्ध शिव मंदिर लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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