संजीवनी टुडे

आदिवासी बहुल क्षेत्रों में कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकती हैं जयस और गोंगपा

संजीवनी टुडे 18-03-2019 21:48:24


भोपाल। लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय दलों के मैदान में कूदने से इस बार मध्यप्रदेश की आदिवासी बहुल सीटों पर मुकाबला रोचक हो गया है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के सीधे मुकाबले में आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) ने भी ताल ठोंक दी हैं। ये दोनों पार्टियां कांग्रेस का गणित बिगाड़ सकती हैं। 

आदिवासी बहुल इलाकों में जयस और गोंगपा का अच्छा प्रभाव है। ये दोनों पार्टियां कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन बात नहीं बन पाई। ऐसी स्थिति में जयस अब खरगोन, धार, झाबुआ-रतलाम और बैतूल से उम्मीदवार खड़ा करेगी। गोंगपा भी छिंदवाड़ा, बैतूल, होशंगाबाद और बालाघाट से चुनाव लड़ने के लिए कमर कस ली है। अगर यह दोनों पार्टियां चुनाव मैदान में उतरती हैं, तो इससे कांग्रेस का आदिवासी वोट बैंक खिसक सकता है। 

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जयस के संस्थापक डॉ. हीरालाल अलावा का कहना है कि हम कांग्रेस से गठबंधन कर चुनाव लड़ने को तैयार थे। लेकिन कांग्रेस ने कोई जवाब नहीं दिया। जयस ने अब धार से भगवान सिंह सोलंकी, खरगोन से डॉ. रक्षा मुजाल्दे, झाबुआ से डॉ. अभय ओहरी और बैतूल से डॉ. रुपेश पद्माकर को उम्मीदवार तय कर लिया है। जल्द ही इनके नामों की विधिवत घोषणा कर दी जाएगी। फिलहाल, पार्टी चार सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।

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गोंगपा के प्रदेश प्रभारी बलवीर सिंह तोमर ने कहा कि उनकी पार्टी मंडला, शहडोल, बालाघाट, सीधी और दमोह लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस के साथ सीटों को लेकर समझौता नहीं हुआ तो छिंदवाड़ा, बैतूल, होशंगाबाद और बालाघाट सीट से पार्टी के उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरेंगे।

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