संजीवनी टुडे

लिटरेचर एंड द कंटम्प्रेरी सोसाइटी‘ थीम पर इंटरनेशनल सिम्पोजियम का हुआ आयोजन

संजीवनी टुडे 23-07-2019 22:37:11

विश्व प्रसिद्ध कवि एवं लेखक डॉ. अमित रंजन और साईप्रस के प्रोफेसर स्टीफनोस स्टीफनाइड्स ने साहित्यिक चर्चा में लिया भाग


जयपुर। कोई भी व्यक्ति चाहे डॉक्टर अथवा इंजीनियर बनना चाहता हो, लेकिन उसका साहित्य, दर्शन एवं इतिहास जैसे लिबरल आर्ट्स विषयों का अध्ययन करना भी बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि वह समाज एवं स्वयं के साथ जुड़ा रह सके। जवाहर कला केंद्र (जेकेके) की साहित्यक गतिविधियों के तहत कृष्णायन में ‘लिटरेचर एंड द कंटेम्पररी सोसाइटी‘ थीम पर आज आयोजित इंटरनेशनल सिम्पोजियम में विश्व प्रसिद्ध कवि एवं लेखक डॉ. अमित रंजन ने यह बात कही। वे  ‘‘आर वी टू व्हररड फॉर वर्ड्स‘?‘ टॉपिक पर सम्बोधित कर रहे थे। 

डॉ. रंजन ने आगे कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है। वर्तमान में हम रिसर्च वर्क के स्थान पर सोशल मीडिया पर जो कुछ देखते हैं उसी के आधार पर अपनी राय बना लेते हैं। हालांकि, नवीन तकनीक एवं सोशल मीडिया का उपयोग करना गलत नहीं है, लेकिन हमें इसे अपने अनुकूल बनाना होगा तथा सोशल मीडिया का और अधिक सृजनात्मक उपयोग करना सीखना होगा।

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सिम्पोजियम के दूसरे वक्ता साइप्रस के प्रोफेसर स्टीफनोस स्टीफनाइड्स ने ‘ए प्रोजेक्ट ऑफ कॉस्मोपोएटिक्स और कॉस्मोपॉलिटिक्स?‘ थीम पर चर्चा करते हुए कहा कि मुख्य रूप से तीन प्रकार की भाषाएं होती हैं - वर्नाक्युलर (मातृ भाषा), रेफरेंशियल (आधिकारिक भाषा) एवं कॉस्मोपॉलिटन। ‘कॉस्मोपॉलिटन‘ दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसमें ‘कॉसमॉस‘ का अर्थ ब्रह्मांड होता है और ‘पोलिस‘ एक प्राचीन राज्य था। इस प्रकार कॉस्मोपॉलिटन का अर्थ वह वस्तु जिसमें सम्पूर्ण ब्रह्मांड समाहित होता है।

प्रोफेसर स्टीफनाइड्स ने आगे कहा कि जब तक भाषा का विकास नहीं होता तब तक कोई संस्कृति विकसित नहीं हो सकती और स्मरणशक्ति इसका एक अपरिहार्य कारक है। मौखिक पद्धति से प्रिंट मीडियम और प्रिंट मीडियम से न्यू मीडिया - साहित्य का कार्यक्षेत्र सदैव परिवर्तित होता रहा है। नई दुनिया की परिकल्पना एवं इसके सृजन का विचार सदैव सतत् रहता है। 

सिम्पोजियम के प्रथम सैशन के पश्चात दोनों वक्ताओं के साथ पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया, जिसका संचालन वरिष्ठ पत्रकार स्वाति वशिष्ठ द्वारा किया गया। 

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सिम्पोजियम के दूसरे सैशन में कविता पाठ एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें डॉ. अमित रंजन ने अपने पोएट्री कलेक्शन ‘फाइंड मी लियोनार्ड कोहेन, आई एम ऑल मोस्ट थर्टी‘ से ‘मिसिंग‘, ‘फॉलोइंग‘ और ‘ढाका‘ जैसी कविताएं सुनाई। प्रोफेसर स्टीफनोस स्टीफनाइड्स ने ‘ब्लू मून इन राजस्थान‘ और ‘रैप्सॉडी ऑन द ड्रैगोमेन‘ कविताएं सुनाई।

इस अवसर पर जेकेके के एडीजी, श्री फुरकान खान द्वारा समापन भाषण दिया गया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के साथ ही जेकेके की साहित्यिक गतिविधियों की शुरूआत भी हो गई है। आगामी माह, 9 अगस्त को जेकेके में गांधी एवं नेहरू पर साहित्यक चर्चा का आयोजन किया जायेगा। 

गोवर्मेन्ट एप्रूव्ड प्लाट व फार्महाउस मात्र रु. 2600/- वर्गगज, टोंक रोड (NH-12) जयपुर में 9314166166

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