संजीवनी टुडे

रिक्त पद भरने और स्पेशलिस्ट से भी बंदियों का परीक्षण कराने के निर्देश

संजीवनी टुडे 26-07-2019 04:56:00

केन्द्रीय कारागार में स्वास्थ्य शिविर लगाये जाने के बाद पीडि़तों को उचित उपचार नहीं मिलने का आरोप लगाने वाले मामले को सख्ती से लिया


जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस केन्द्रीय कारागार में स्वास्थ्य शिविर लगाये जाने के बाद पीडि़तों को उचित उपचार नहीं मिलने का आरोप लगाने वाले मामले को सख्ती से लिया और रिक्त पद भरने और स्पेशलिस्ट से भी बंदियों को परीक्षण कराने के निर्देश दिए।

उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आर एस झा व जस्टिस व्हीके शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष विगत दिवस दिये गये आदेश के परिपालन में आज जेल अधीक्षक गोपाल ताम्रकार हाजिर हुए। जिन्होने बताया कि डॉक्टरों के तीन पद है, जिनमें से दो रिक्त है। जिस पर न्यायालय ने उक्त पदों को भरने व बंदियों की स्पेशलिस्ट से जांच कराने संबंधी मामले में स्ट्रंक्शन प्राप्त कर जवाब देने के निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिये मुलतवीं कर दी।

मामला मदनमहल आमनपुर निवासी बृजेन्द्र सिंह चौधरी की ओर से दायर किया गया है, जिसमें कहा गया है कि मेडीकल कालेज की ओर से नेताजी सुभाषचंद्र बोस केन्द्रीय जेल जबलपुर में स्वास्थ्य शिविर लगाया गया था। जिसमें करीब 50 से 60 बंदी मोतियाबिंद के पीडि़त पाये गये थे, लेकिन इसके बाद उनके उपचार की कोई व्यवस्था नहीं की गई और नहीं उन्हें किसी प्रकार का उपचार दिया जा रहा है। मामले में प्रमुख सचिव जेल, होम, स्वास्थ्य विभाग सहित डीजी व जेल अधीक्षक जबलपुर व मेडीकल कालेज के डीन को पक्षकार बनाया गया है।

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