संजीवनी टुडे

औद्योगीकरण ने उपभोक्तावादी संस्कृति को बढ़ावा दिया - प्रो. पाण्डेय

संजीवनी टुडे 24-04-2019 17:06:51


प्रयागराज। वर्तमान दौर में मूल्यों के ह्रास की बात कही जा रही है। इसके मूल में अज्ञानता है। इसके साथ औद्योगीकरण और मूल्य शिक्षण का अभाव भी प्रभावी कारक है। अज्ञानता से आसक्ति और अहंकार जन्म लेता है। 

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औद्योगीकरण ने उपभोक्तावादी संस्कृति को बढ़ावा दिया है। इस संस्कृति में आवश्यकता से अधिक चीजों के क्रय-विक्रय ने लालच और उपभोग को बहुत बढ़ावा दिया है।

यह बातें प्रो.ऋषि कान्त पाण्डेय, पूर्व अध्यक्ष, दर्शनशास्त्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने पं. मदन मोहन मालवीय टीचर्स एण्ड ट्रेनिंग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, नई दिल्ली स्कीम के तहत स्थापित फैकल्टी डेवलपमेंट सेंटर द्वारा ईश्वर शरण पीजी काॅलेज में आयोजित एक माह के इंडक्शन टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत बुधवार को ‘एथिक्स और वैल्यूज’ पर कही। 

उन्होंने कहा कि उपभोग ने व्यक्ति को स्वकेन्द्रित और संवेदना शून्य बना दिया है। महाविद्यालयों में मूल्य विहीन शिक्षण ने मूल्यों के प्रति उदासीनता पैदा की है, जिसका परिणाम मूल्य संकट के रूप में दिख रहा है। एथिक्स से इसका निदान संभव है, क्योंकि प्रत्येक इंसान के मनुष्य मात्र होने से बेहतर मनुष्य होने को ध्येय रखा जाता है। 

दूसरे सत्र में प्रो.राजेन्द्र कुमार, पूर्व अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, इविवि ने ‘‘अण्डर स्टैण्डिंग हायर एजुकेशन इन इण्डिया एण्ड पेडागाॅगी’’ विषय पर कहा कि ज्ञान, विज्ञान और शिक्षा तीनों शब्दों का एक ही अर्थ नहीं है। आज भी शिक्षण संस्थानों को शिक्षालय नाम से नहीं, अपितु विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के नाम से ही जाना जाता है। 

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इससे इस बात को बल मिलता है कि शिक्षा और विद्या (ज्ञान) में पर्याप्त अन्तर है। उन्होंने सुकरात से लेकर आधुनिक कई शिक्षाविदों के माध्यम से पेडागाॅगी को विस्तार से समझाया। कार्यक्रम में समन्वयक डॉ.विकास कुमार, सह समन्वयक डॉ.अखिलेश पाल,डा.मनोज दुबे, डॉ.धीरज चौधरी के साथ ही महाविद्यालय के समस्त प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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