संजीवनी टुडे

वीवीपीएटी की पर्चियों की गिनती नहीं करने का आधार भी सार्वजनिक करने से इनकार

संजीवनी टुडे 06-12-2018 21:07:42


जोधपुर। भारत निर्वाचन आयोग ने छेड़छाड़ की शिकायतों से घिरी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की विश्वनीयता बनाए रखने के लिए इस बार लागू की गई वोटर वैरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) की पर्चियों की मतगणना में गिनती नहीं करने के सम्बन्ध में दायर आरटीआई के तहत सूचनाएं सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। जोधपुर के आरटीआई सलाहकार और राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता रजाक के. हैदर ने भारत निर्वाचन आयोग में आरटीआई दाखिल कर वीवीपीएटी में प्रिंट होने वाली मतदान पर्चियों की गणना अनिवार्य रूप से नहीं करने के सम्बन्ध में सूचनाएं चाही थी। जिस पर निर्वाचन आयोग के केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि, चाही गई सूचनाएं अस्पष्ट है और यह किसी भी दस्तावेज के प्रारूप में उपलब्ध नहीं है।
 
एडवोकेट हैदर ने राजस्थान विधानसभा चुनाव-2018 की मतगणना में वीवीपीएटी में प्रिंट होने वाली मतदान पर्चियों की गणना अनिवार्य रूप से करने और उसके आंकड़े सार्वजनिक करते हुए उसके आधार पर ईवीएम के आंकड़े वेरिफाई करने के बाद परिणाम घोषित करने बाबत भारत निवार्चन आयोग को प्रतिवेदन भी भेजा था, जिसका भी निर्वाचन आयोग ने कोई प्रतिउत्तर नहीं दिया। ऐसे में उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग के केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी के समक्ष आरटीआई दायर कर इस बारे में सूचनाएं चाही थी कि, वीवीपीएटी की पर्चियों की गिनती अनिवार्य रूप से नहीं करने का क्या आधार निर्वाचन आयोग ने माना है, लेकिन निर्वाचन आयोग ने इससे भी पल्ला झाड़ लिया। अब उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग के प्रथम अपीलीय अधिकारी और प्रमुख सचिव के समक्ष आरटीआई अधिनियम की धारा 19 (1) के तहत प्रथम अपील दायर की

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