संजीवनी टुडे

हिमाचल विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश में धांधली का आरोप, न्यायिक जांच की मांग

संजीवनी टुडे 21-05-2019 19:28:45


शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की एसएफआई रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ने डीन ऑफ स्टडीज अरविंद कालिया और वरिष्ठ प्रोफैसर कुलवंत सिंह पठानिया पर पीएचडी और एमफिल में फर्जी प्रवेश के आरोप लगाए हैं। मंगलवार को विवि में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के सचिव नोवल ठाकुर और उपाध्यक्ष अनिल नेगी ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार गैर कानूनी तरीकों से व नियमों को नजरंदाज करके विश्वविद्यालय में अपनी मनमानी कर रहा है। जिसके चलते काबिल और पात्रा रखने वाले छात्रों को दरकिनार किया गया है। यही नहीं अरविंद कालिया पर पात्रा के नियमों को हैडरिटन देकर अपात्र को दाखिला देने का भी आरोप है। 

पहला मामला कॉमर्स विभाग में पूर्व कुलपति के बेटे कर्ण गुप्ता को पीएचडी में फर्जी प्रवेश ओर फिर थीसिज मात्र 11 महीने में जमा करवाने का आरोप है। जबकि यूजीसी के नियमों के तहत थीसिज जमा करने का न्यूनतम अवधि तीन वर्ष होनी चाहिए। 

दूसरा मामला अध्यापक कोटे से पीएचडी की सीट एक निजी महाविद्यालय में अध्यापन करने वाली अध्यापिका नेहा वालिया को दिया जाना है, जो कि पीएचडी में प्रवेश दिलाने के लिए नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाना है। जबकि यूजीसी नियम कहा है कि सरकारी कॉलेजों में अध्यापन करने वाले अध्यापकों को ही पीएचडी में प्रवेश दिया जाएगा। 

तीसरा आरोप भी टीचर कोटे से निजी कॉलेज में पढ़ाने वाले व्यक्ति प्रवेश को पास्ट प्रैस्टिस के आधार पर पीएचडी में टीचर कोटे से प्रवेश के लिए अनुमति देना है। 

चैथा मामला एमसीए कोर्स में एक कॉमर्स के छात्र को प्रवेश दिया जाना है। जबकि नियमों के अनुसार ग्रैजूएशन में गणित विषय पढ़ा हुआ होना चाहिए। जबकि प्रार्थी छात्र के पास ग्रैजूएशन में गणित विषय रहा ही नहीं। हैरानी की बात है कि अब यही छात्र विश्वविद्यालय में प्रौफेसर पद पर कार्यरत है। पांचवा मामला गैर कानूनी तौर पर छात्र प्रत्यूश गुलेरिया के थीसिज को गैरकानूनी ढंग से जमा करवाने से संबंधित है। 

एसएफआई का आरोप है कि कुलपति कार्यालय से इस छात्र के थीसिज को जमा करवाने का दवाब है। जबकि उसकी विश्वविद्यालय में एक भी हाजरी नहीं है। जबकि नियमों के अनुसार पीएचडी करने वाले छात्र के थीसिज तभी जमा होते हैं जब वे 12 माह तक चेयरपर्सन के सुपरविजन में रैजीडेंस करता हो। लेकिन इस छात्र के मामले में भी सभी नियम दरकिनार कर दिए गए हैं। 

एसएफआई ने इस मामले में राज्यपाल आचार्य देवव्रत से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच हो। उन्होंने कहा कि कुलपति स्तर पर कई मामलों की जांच हो रही है, लेकिन आज तक उसमें कोई कार्रवाई नहीं हुई है। साथ ही इस बार जो आरोप है उसमें डीएस और प्रौफेसर ही नहीं कुलपति भी जांच के दायरे में होने चाहिए। 

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दूसरी तरफ प्रदेश विवि के डीन आॅफ स्टडीज अरविंद कालिया का कहना है कि उनके समय पीएचडी में नियमों के तहत ही दाखिले हुए हैं। जिस निजी कॉलेज की महिला अध्यापिका को पीएचडी में प्रवेश दिया गया है वह भी नियमों के तहत है। नियमों के तहत यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेज की ओर से आए आवेदन को स्वीकार किया गया है। उन्होंने कहा कि बाहर से कोई भी दाखिला नहीं किया गया है। 

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