संजीवनी टुडे

राज्य में मृत्युभोज पर रोक सरकार का ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी कदम - गहलोत

संजीवनी टुडे 12-07-2020 14:21:08

राजस्थान शिक्षक संघ के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र गहलोत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा राज्य में मृत्युभोज जैसी सामाजिक बुराई पर रोक लगाने के फैसले को ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी कदम बताकर स्वागत किया है।


शिवगंज। राजस्थान शिक्षक संघ(प्रगतिशील) के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र गहलोत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा राज्य में मृत्युभोज जैसी सामाजिक बुराई पर रोक लगाने के फैसले को ऐतिहासिक एवं  क्रांतिकारी कदम बताकर स्वागत किया है। शिक्षक संघ(प्रगतिशील) के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष गहलोत ने बताया कि किसी भी परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु उस परिवार के लिए एक दुःखद घड़ी होती है और बाद में उस व्यक्ति की मृत्यु पर मृत्युभोज का आयोजन किसी भी दृष्टि से शोभनीय नहीं है। 

मृत्युभोज हर समाज में एक सामाजिक ऐसी कुरीति है ,जिसके आयोजन में परिवार शादी जैसे कार्यक्रम की तरह लाखों रुपये खर्च करता है ,जबकि मृत्यु जैसी दुःखद घटना पर मृत्युभोज पर  इस तरह लाखों रुपये खर्च करना, किसी की मृत्यु पर जश्न या खुशी मनाने जैसा कार्यक्रम कहलाता है और किसी की मृत्यु के बाद उसके नाम ऐसे कार्यक्रम का आयोजन हर समाज में एक फिजूलखर्ची ,एक आडम्बर ,एक कलंक ,एक कुरीति एवम एक अंधविश्वास है, जिस पर रोक लगाना हर समाज के लिए बहुत ही आवश्यक है। 

क्योंकि मृत्युभोज के आयोजन के लिए किसी परिवार को तो किसी से लाखों रुपये का कर्ज भी उधार लेना पड़ता है और इस कर्ज को चुका नहीं पाने के कारण आत्महत्या जैसी घटना भी समाज में होती है तथा इस कर्ज के कारण उक्त परिवार जिंदगीभर के लिए किसी का गुलाम बनने को मजबूर हो जाता है ,सिर्फ इस मृत्युभोज जैसे आयोजन के लिए। मृत्युभोज जैसी इस सामाजिक कुरीति के आयोजन में कर्ज में सबसे ज्यादा मध्यम और गरीब श्रेणी का परिवार बर्बाद होता है। 

प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा वर्षों से चली आ रही मृत्युभोज जैसी सामाजिक कुरीति पर रोक लगाना राजस्थान में हर समाज के लिए सामाजिक जागरण का  एक नया क्रांतिकारी कदम है ,जिसका हर समाज द्वारा स्वागत करके समाज से मृत्युभोज जैसी कुरीति को मिटाने में सरकार का साथ देकर समाज में इस फिजूलखर्ची पर रोक लगानी चाहिए। 

किसी भी पौराणिक या सामाजिक ग्रन्थ में  मृत्युभोज का अवश्य आयोजन कहीं भी उल्लेखित और प्रमाणित नहीं है। मृत्युभोज के आयोजन पर होने वाले खर्च को अपने परिवार या समाज या देश में शिक्षा ,चिकित्सा जैसे कार्यों या किसी गरीब परिवार के उत्थान पर खर्च करना चाहिए।

वर्षों से चली आ रही  समाज में मृत्युभोज जैसी सामाजिक कुरीति को मिटाने में शिक्षित युवाओं की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है और इस कार्य के लिए शिक्षित व्यक्तियों द्वारा आगे आकर पहल करना बहुत ही जरूरी है। इसके अतिरिक्त हर समाज के प्रत्येक व्यक्ति को भी अपने समाज और अपने परिवार में मृत्युभोज पर रोक लगाने की शपथ लेनी चाहिए।

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