संजीवनी टुडे

नवयुवक देश भक्त का बलिदान याद रखेगा हिन्दुस्तान, अंग्रेज अधिकारी की हत्या कर कैदियों के अपमान और...

संजीवनी टुडे 07-07-2020 22:37:10

मंगलवार को साहित्यकारों ने अंग्रेज अधिकारी की हत्या कर कैदियों के अपमान और यातनाओं का बदला लेने वाले क्रांतिकारी दिनेश गुप्ता को श्रद्धांजलि दी।


हमीरपुर। सुमेरपुर कस्बे में जरा याद करो कुर्बानी कार्यक्रम के तहत वर्णिता संस्था के तत्वाधान में मंगलवार को साहित्यकारों ने अंग्रेज अधिकारी की हत्या कर कैदियों के अपमान और यातनाओं का बदला लेने वाले क्रांतिकारी दिनेश गुप्ता को श्रद्धांजलि दी। संस्था के अध्यक्ष डा.भवानीदीन ने कहा कि कितने ऐसे लोग हैं, जो यह जानते हैं कि 20 वर्ष का एक युवा देश की आजादी के लिए क्रूर अंग्रेज अधिकारी की हत्या कर न केवल कैदियों के अपमान और यातनाओं का बदला लिया अपितु हंसते-हंसते अपने को मातृभूमि के लिए न्योछावर कर दिया। 

आज के इतिहासकारों ने पक्षपात करते हुए कहा है कि केवल अहिंसा का झंडा लेकर चलने वालों ने ही देश की आजादी के लिए प्रमुख योगदान दिया हैं। जबकि हकीकत कुछ और हैं। अहिंसा वादियों से हटकर गरम दल के सशस्त्र क्रांतिकारियों का कम प्रति भाग नहीं रहा है, दिनेश गुप्ता जैसे कम उम्र के क्रांतिकारियों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। देश की आजादी के लिए क्रांतिकारियों के अनुदानय को नकारा नहीं जा सकता हैं। 

दिनेश गुप्ता का जन्म 6 दिसंबर 1911 को बंगाल के मुंशीगंज जिले के जोशो लाग गांव में सतीश चंद्र गुप्ता के घर हुआ थां। मां का नाम विनोदिनी देवी था। अपने शिक्षा काल में दिनेश गुप्ता सुभाष चंद्र बोस के बंगाल के क्रांतिकारी संगठन से जुड़ गए दिनेश के अंदर देश प्रेम की प्रबल भावना जाग उठीं। उसने उन क्रूर अन्ग्रेज दंडित करने का मन बनाया जो क्रांतिकारी कैदियों को यातनाएं देते थे। दिनेश ने हथियारों की ट्रेनिंग ली और जेल के कुख्यात और क्रूर अधिकारी सिंपसन को सजा देने का मन बनाया। वह अपने साथी विनय बसु और बादल गुप्ता के साथ योजना के अनुरूप गोरों की राइटर्स बिल्डिंग में घुसकर सिंपसन को 8 दिसंबर 1930 को मौत के घाट उतार दिया।

 इससे गौरों में हड़कंप मच गयां। वहीं पुलिस ने तीनों को घेर लिया, तीनों ने अपने को खत्म करने की योजना बनाईं। बादल ने जहर खाकर अपने को खत्म किया, शेष दोनों ने अपने को गोली मार लीं। घायल विनय ने अस्पताल में दम तोड़ा, दिनेश बच गए दिनेश के खिलाफ गौरों का न्याय का नाटक प्रारंभ हुआ। उन्हें 7 जुलाई 1931 को फांसी पर लटका दिया गया। एक 20 वर्ष का युवा शहीद हो गया, इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता हैं। कार्यक्रम में अवधेश कुमार गुप्ता एडवोकेट, राजकुमार सोनी सरार्फ, लल्लन गुप्ता, राधारमण गुप्ता और कल्लू चौरसिया मौजूद रहे।

यह खबर भी पढ़े: बलिया: महिला अफसर की खुदकुशी मामले में नया मोड़, पिता ने कहा- बेटी को मारकर पंखे से लटकाया गया

यह खबर भी पढ़े: गलवान घाटी : नदी के किनारों लगे चीनियों के कैम्प पानी के तेज बहाव में बए, वापस लौटने को मजबूर

ऐसी ही ताजा खबरों व अपडेट के लिए डाउनलोड करे संजीवनी टुडे एप

More From state

Trending Now
Recommended