संजीवनी टुडे

सरकारी स्कूलों में प्रधानाध्यापकों की नियुक्तियों पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

संजीवनी टुडे 22-01-2019 22:48:13


कोलकाता। पश्चिम बंगाल के विभिन्न सरकारी स्कूलों में नए सिरे से प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति पर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अंतरिम रोक लगा दी है। मंगलवार को न्यायमूर्ति शेखर बॉबी सराफ की न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद आदेश दिया कि वर्तमान में एक महीने के लिए राज्य के विभिन्न स्कूलों में प्रधानाध्यापक की नियुक्ति प्रक्रिया में होने वाली काउंसलिंग और अन्य प्रक्रियाओं पर रोक रहेगी। इस मामले में कोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर राज्य शिक्षा विभाग से जवाब मांगा है। 

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दरअसल, वर्ष 2015 तक सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापक के पद पर नौकरी पाने के लिए स्नातकोत्तर डिग्री के साथ न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य था। साल 2016 में न्यूनतम अंक बढ़ाकर 45 प्रतिशत कर दिया गया। इसके बाद वर्ष 2017 में यह तय किया गया कि प्रधानाध्यापक पद पर नियुक्त होने के लिए स्नातकोत्तर में कम से कम 50 फीसदी नंबर होना चाहिए। इसके खिलाफ न्यायालय में जनहित याचिका लगाई गई थी। तब न्यायालय ने निर्देश दिया था कि स्नातकोत्तर की परीक्षा पास करने वाले सारे लोग प्रधानाध्यापक की नियुक्ति संबंधी परीक्षा दे सकेंगे। जब परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ तब पाया गया कि जिन लोगों ने भी इससे संबंधित याचिका न्यायालय में लगाई थी, उन्हें हटाकर रिजल्ट घोषित किया गया था।

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इसके बाद एक बार फिर अभ्यर्थियों ने न्यायालय में याचिका लगाई। इसी मामले में मंगलवार को न्यायमूर्ति शेखर बॉबी सराफ की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने साफ कर दिया है कि फिलहाल एक महीने तक काउंसलिंग की कोई भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़नी चाहिए। इसके साथ ही न्यायमूर्ति ने एक सप्ताह का समय देकर राज्य शिक्षा विभाग से इस मामले पर जवाब तलब किया है कि आखिरकार याचिकाकर्ताओं को हटाकर परिणाम क्यों घोषित किया गया। उल्लेखनीय है कि आगामी 24 जनवरी से ही काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू होनी थी। 

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