संजीवनी टुडे

कप्तान पर भारी पड़ी, नेताओं की फूट और संगठनात्मक ढांचा की कमी

संजीवनी टुडे 25-05-2019 19:52:18


रेवाड़ी। 17वीं लोकसभा के संपन्न हुए चुनाव में कांग्रेस की प्रदेश भर में करारी हार हुई है। यूं तो इस हार के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, लेकिन प्रमुखतौर पर पार्टी का संगठनात्मक ढांचा नहीं होना सामने आया है। गुरुग्राम लोकसभा सीट की बात की जाए तो यहां बूथ लेवल की तो बात ही अलग है, पार्टी के ब्लॉक अध्यक्ष तक नहीं है, जिससे कार्यकर्ता एकजुट होकर पार्टी के पक्ष में काम नहीं कर पाए। कांग्रेस प्रत्याशी रहे कप्तान अजय सिंह यादव में पत्रकारवार्ता के दौरान कह भी चुके हैं कि पार्टी में संगठन नाम की कोई चीज नहीं है। इसके अलावा कांग्रेस नेताओं की आपसी फूट का भी शिकार हुई है। इस फूट ने भी चुनाव में भाजपा की जमकर मदद की है।

 गुरुग्राम लोकसभा सीट पर भाजपा ने राव इंद्रजीत सिंह व कांग्रेस ने पूर्व मंत्री कप्तान अजय सिंह यादव को चुनाव मैदान में उतारा था। निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि राव के मुकाबले कप्तान अजय सिंह यादव काफी कमजोर उम्मीदवार है। बेशक कप्तान अजय सिंह यादव रेवाड़ी से छह बार विधायक बने हैं, लेकिन लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए वे पहले से ही मजबूत दिखाई नहीं पड़ रहे थे। कप्तान अजय सिंह यादव ने चुनाव के दौरान यह जरूर कहा कि वह चुनाव जीतेंगे, लेकिन पंजाबी समाज की चुनावी सभा में उन्होंने यह भी कहा कि गुरूग्राम में उन्हें ज्यादा लोग नहीं जानते, इसलिए लोगों को अपनी रिश्तेदारी में स्वंय उनके नाम का प्रचार करना होगा।

 इसके अलावा पार्टी का संगठनात्मक ढांचा नहीं होना कप्तान की हार में बहुत बड़ा रोल अदा कर गया। यहां पार्टी के पदाधिकारी ही पूरे नहीं थे। उनके अपने समर्थक क्षेत्र विशेष में ही अपना प्रचार कर रहे थे। पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से ज्यादा प्रचार नहीं हो पाया। कप्तान अजय सिंह यादव ने स्वंय पत्रकारवार्ता में खुलासा किया कि गुरूग्राम व बादशाहपुर क्षेत्र में कार्यकर्ता नहीं होने के कारण 611 बूथ में से 194 पर उनके एजेंट तक नहीं थे। 

कांग्रेस प्रत्याशी कप्तान अजय सिंह यादव की इतनी बड़ी हार का दूसरा बड़ा कारण नेताओं की आपसी फूट भी रहा। आपसी फूट के कारण वे अकेले पड़ गए, जिससे जहां वे सभी मतदाताओं तक नहीं पहुंच पाए, वहीं साथी नेताओं के प्रभाव से मिलने वाली वोट से भी वंचित रह गए। बेशक राहुल गांधी ने गुरुग्राम में उनके पक्ष में जनसभा को संबोधित किया, लेकिन इसका उन्हें ज्यादा लाभ नहीं मिल पाया। कप्तान अजय सिंह यादव ने स्वंय कहा कि वे सभी मनमुटाव भुलाकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा के पास गए थे, उनसे बात भी की, लेकिन बावजूद इसके वे उनके प्रचार के लिए नहीं आए। 

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इधर चर्चा हो रही है कि यदि हुड्डा उनके प्रचार में आते तो कप्तान का मनोबल तो बढ़ता ही, संभवतया उनकी हार में मतों का अंतर कम हो जाता। वो अलग बात है कि इस चुनाव में मोदी की आंधी में कांग्रेस के बड़े-बड़े किले ढह गए। हुडडा जहां बहुत बड़े अंतर से सोनीपत से चुनाव हार गए, वहीं उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा भी अपनी परंपरागत सीट को नहीं बचा पाए।

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