संजीवनी टुडे

दादा मुंशीराम व अन्य उपेक्षित रचनाकारों की ग्रंथावलीयों पर ई-बुक का प्रकाशन करेगी हरियाणा ग्रंथ अकादमी

संजीवनी टुडे 10-11-2018 17:14:04


फतेहाबाद। हरियाणवी लोक संस्कृति की शुद्धता बनाए रखने का काम नई पीढ़ी के लेखकों और लोक गायकों का है। आधुनिकता के नाम पर फूहड़ता फैलाने वालों को हरियाणा और हरियाणवी संस्कृति का नाम खराब करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। यह बात भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं टोहाना के विधायक सुभाष बराला ने शनिवार को जिले के जांडली खुर्द गांव में चौधरी मुंशीराम न्यास द्वारा आयोजित रागनी प्रतियोगिता में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए कही

 हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष और निदेशक वीरेंद्र सिंह चौहान कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित थे। गांव जांडली में जन्मे लोक गायक दादा मुंशी राम की स्मृति में गठित चौधरी मुंशी राम ट्रस्ट द्वारा रागनी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था, जिसमें प्रदेशभर के लोक गायकों व रचनाकारों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर चौधरी मुंशीराम ट्रस्ट की ओर से भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के समक्ष कुछ मांगे भी रखी गई, जिनमें गांव के खेल परिसर का नाम लोक गायक दादा मुंशी राम के नाम पर रखने तथा उनकी स्मृति में एक द्वार व स्मारक बनाए जाने की मांग प्रमुख थी। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि जल्द ही इन मांगों को पूरा करने की दिशा में सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। 

श्री बराला ने कहा कि प् ऐसे अनेक लोक गायक रहे हैं, जिनकी अमर रचनाएं न केवल प्रदेश में बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी प्रसिद्ध है, लेकिन पूर्व की सरकारों ने ऐसे कई लोक गायकों की पूरी तरह से अनदेखी की। प्रदेशाध्यक्ष बराला ने कहा कि वर्तमान हरियाणा सरकार ऐसे उपेक्षित रचनाकारों व लोक गायकों की रचनाओं को जन -जन तक पहुंचाने के लिए कटिबद्ध है। हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं निदेशक प्रोफेसर वीरेंद्र चौहान ने कहा कि दादा मुंशीराम ऐसे लोक गायक थे, जिन्होंने गुलामी के दौर में अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों में राष्ट्रीयता के भाव जगाए। 

उन्होंने शहीद क्रांतिकारियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया। दादा मुंशी राम ने वीर अमर सिंह राठौड़ तथा झांसी की रानी लक्ष्मी बाई जैसी वीरांगनाओं पर भी रचनाएं लिखी। उन्होंने भारतीय जीवन मूल्य तथा वैदिक संस्कृति को भी अपनी रचनाओं में प्रमुख स्थान दिया। प्रोफेसर चौहान ने कहा कि दादा मुंशीराम व उन जैसे अन्य उपेक्षित रचनाकारों की ग्रंथावलीओं को हरियाणा ग्रंथ अकादमी नए स्वरूप में प्रस्तुत करेगी।

 इन रचनाकारों की रचनाओं पर ई-बुक का प्रकाशन भी किया जाएगा, ताकि लोग अपने मोबाइल पर विभिन्न सामाजिक माध्यमों के जरिए इन रचनाओं से रूबरू हो सकें। रागनी प्रतियोगिता में कलाकार मुनिगर पाबड़ा, नरेंद्र खरकराम जी, भीम सनडील, कर्मवीर सॉन्गरी व सुमित जांडली ने आजाद कवि चौधरी मुंशीराम की रचनाओं पर अपनी प्रस्तुतियां दी। इस अवसर पर रामनिवास जांडली, चंद्र लाल सोनी, सोमनाथ, मनजीत, रविंद्र मण्डा, सरपंच जांडली खुर्द, प्रेम, विजय शर्मा, रमेश कुमार, बृज लाल भाकर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक व श्रोतागण उपस्थित थे।

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