संजीवनी टुडे

युवाओं के लिए मिशाल बना हरेन्द्र, मेहनत से बंजर भूमि पर उगाई हौसलों की फसल

संजीवनी टुडे 31-05-2020 16:47:18

सपना वह नहीं जो हम नींद में देखते हैं, बल्कि सपना वो है, जो आपको सोने नहीं देता। देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की इन पंक्तियों को सीमांत जनपद चमोली के गैरसैंण ब्लाॅक के सिलंगा गांव निवासी हरेन्द्र शाह नें हकीकत में चरितार्थ करके दिखाया है।


गोपेश्वर। सपना वह नहीं जो हम नींद में देखते हैं, बल्कि सपना वो है, जो आपको सोने नहीं देता। देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की इन पंक्तियों को सीमांत जनपद चमोली के गैरसैंण ब्लाॅक के सिलंगा गांव निवासी हरेन्द्र शाह नें हकीकत में चरितार्थ करके दिखाया है। हरेन्द्र का सपना था कि वह अपने पहाड़ की बंजर खेती को उपजाऊ बनाए और पहाड़ में ही रोजगार के अवसर का सृजन करके दूसरे युवाओं को भी रोजगार मुहैया करवाये। हरेन्द्र का यह सपना अब धरातल में हकीकत पूरा हो चुका है। हरेन्द्र ने बंजर खेतों को इस कदर उपजाऊ बनाया कि आज ये खेत सोना उगल रहा है। हरेन्द्र शाह का वोकल फॉर लोकल माॅडल युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है।

गैरसैंण प्रखंड के सिलंगा गांव के बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले हरेन्द्र शाह ने बीएससी (पीसीएम) की डिग्री देहरादून के डीएवी कालेज से पूरी की। डिग्री के बाद हरेन्द्र के पास अपने सुनहरे भविष्य के लिए बहुत सारे विकल्प थे। वो चाहता तो अच्छी खासी नौकरी के लिए प्रयास करता लेकिन हरेन्द्र ने पहाड़ों पर ही रहकर ही कुछ बड़ा कर और लोगों के लिए एक उदाहरण भी प्रस्तुत करना चाहता था। अपने सपने को सच करने के लिए हरेन्द्र नें सब्जी उत्पादन की ठानी। 

अपने गांव सिलंगा में खिल नामक स्थान पर बंजर पड़ी 10 नाली भूमि पर हरेन्द्र नें दो पाॅली हाउस लगाये और बंजर भूमि को उपजाऊ योग्य बनाने में दिन रात एक कर दिया। इसमें हरेन्द्र के परिवार नें भरपूर साथ दिया। हरेन्द्र के परिवार में उनके मां-पिताजी के अलावा तीन बहनें हैं। जिनमें से एक की शादी हो चुकी है। आखिरकार हरेन्द्र की जिद और मेहनत रंग लाई। फलतः आज बंजर भूमि में सोना उग रहा है। बीते एक साल के दौरान हरेन्द्र ने लगभग हर प्रकार, मटर, गोबी, शिमला मिर्च, टमाटर, प्याज, मूली, ककडी, खीरा, बैंगन, फ्रासबीन से लेकर हर सब्जी का उत्पादन किया। 

हरेन्द्र बताते हैं कि शुरू में तो उन्हें बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लोगों ने हतोत्साहित भी किया। परंतु परिवार और दोस्तों के सहयोग से ही अपना काम किया। सुबह पांच बजे उठ कर शाम के 7 बजे तक अपने फार्म में मेहनत करने के साथ तीन लाख रुपये की पूंजी भी लगा। उसकी मेहनत रंग लायी और आज यह फार्म उसे अच्छी खासी आमदनी दे रहा है। गांव के चार युवाओं को भी रोजगार दिया है। 

हरेन्द्र ने जैविक खेती पर जोर दिया है। उसके फार्म की पूरी सब्जी की खफत मेहलचैरी बाजार में ही हो जाती है। अब वह धीरे-धीरे इसको बड़े स्तर पर ले जाना सपना है। वह सब्जी उत्पादन के साथ साथ डेरी, कुकुट, मत्स्य, मशरूम, कीवी उत्पादन को बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। हरेन्द्र की मेहनत बताती है कि पहाड़ पर रहकर भी बहुत कुछ किया जा सकता है।

यह खबर भी पढ़े: मासिक धर्म के प्रति जागरुकता फैलाएंगी मानुषी छ‍िल्‍लर, यूनीसेफ के साथ मिलाया हाथ

यह खबर भी पढ़े: चार में से एक भारतीय लड़का कतराता हैं शादी करने से, जानिए क्या है वजह

ऐसी ही ताजा खबरों व अपडेट के लिए डाउनलोड करे संजीवनी टुडे एप

More From state

Trending Now
Recommended