संजीवनी टुडे

गंगा पायलट प्रोजेक्ट से कानपुर में स्वच्छ होगी मोक्षदायिनी : विनोद तारे

संजीवनी टुडे 17-05-2019 22:22:22


कानपुर। गंगा नदी को स्वच्छ रखने के लिए कानपुर के नालों को तो टैप कर दिये गये हैं। पर अभी भी बहुत सी छोटी-छोटी नालियां गंगा में गिर रही हैं। जिसको लेकर गंगा पायलट प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। इसके अमल में आते ही कानपुर में मोक्षदायिनी गंगा स्वच्छ हो जाएंगी। यह बातें शुक्रवार को गंगा पर काम कर रहे आईआईटी के प्रोफेसर विनोद तारे ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कही।शासन-प्रशासन के प्रयास से कानपुर में गंगा में गिरने वाले नालों को टेप करने से गंगा को काफी हद तक मैली होने से बचाया जा सका है। इसके बावजूद अभी भी घरों ने निकलने वाली छोटी छोटी नालियां गंगा को मैला कर रही हैं। इसके साथ ही सीवर समस्या भी जस की तस बनी हुयी है। 

इसको देखते हुए कानपुर नगर निगम ने पहल करते हुए गंगा पायलट प्रोजेक्ट पर काम शुरु कर दिया है। जिसमें नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (एनआईयूए) के साथ कानपुर आईआईटी का भी सहयोग मिल रहा है। इसको लेकर शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता की गयी। जिसमें गंगा पर काम कर रहे आईआईटी के प्रोफेसर विनोद तारे ने बताया कि गंगा पायलट प्रोजेक्ट की रुपरेखा तय कर ली गयी है। जिसके तहत शहर से निकलने वाली सभी नालियों का पानी रिसाइकिल किया जाएगा। इस पानी को पीने लायक बनाया जाएगा और गंगा में अब यह पानी नहीं जा सकेगा। हालांकि इस काम पर अभी करीब 15 वर्ष लग जाएंगे। लेकिन प्रोजेक्ट पूरा होने पर कानपुर में मोक्षदायिनी गंगा पूरी तरह से स्वच्छ दिखेगी। 

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नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा ने बताया कि नगर निगम गंगा को क्लीन करने की तैयारी कर चुका है। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स और आईआईटी के सहयोग से गंगा पायलट सफाई का मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया है। प्लान पर कई बैठकों के साथ चर्चा भी होनी शुरु हो गयी है। नालों को बन्द करने से गंगा साफ नहीं होगी, बल्कि प्रदूषित पानी को शुद्ध कर इसे प्रयोग में लाने से पानी संकट और गंगा दोनों को बचाया जा सकेगा। यह बात कानपुर आईआईटी के प्रोफेसर विनोद तारे ने साबित भी कर दी है। उन्होंने कड़े शोधों के बाद पायलट प्रोजेक्ट को तैयार कर लिया है। इस प्रोजेक्ट से नालों के किनारे सीवर लाइन बिछायी जायेगी और घरों की लाइनों को इससे जोड़ा जायेगा। घरों के बाहर बहने वाले नाले को नदी का रुप दे कर पानी को लोगों के प्रयोगलायक बनाया जायेगा। यह रणनीति लोगों की जागरुकता पर निर्भर होगी और साथ ही धरातल पर दिखने के लिए लम्बा समय भी लगेगा। इसके लिए जिन जगहों पर गंदे पानी को शुद्ध करने के लिए प्लांट लगाना है उन जगहों का चयन भी कर लिया गया है। 

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