संजीवनी टुडे

गांधी जी ने अपना जीवन सत्य, या सच्चाई की व्यापक खोज में समर्पित कर दिया

संजीवनी टुडे 10-08-2019 20:53:15

कार्यक्रम में गांधी जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।


धौलपुर। धौलपुर पंचायत समिति सभागार में प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित करते अतिथि। युवा पीढी से महात्मा गांधी के जीवन से प्रेरणा लेने का आव्हान गांधी प्रदर्शनी का हुआ समापन,विजेताओं को किया सम्मानित धौलपुर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों का समापन शनिवार को हुआ। धौलपुर पंचायत समिति सभागार में विद्यार्थी और गांधीजी के सिद्धांत विषय पर आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने युवाओं से महात्मा गांधी के जीवन से प्ररेणा लेने का आव्हान किया।

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कार्यक्रम में गांधी जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद गांधी जीवन दर्शन समिति के संयोजक दुर्गादत्त शास्त्राी ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का संपूर्ण दर्शन विश्व के लिए प्रेरणा का स्रोत है। गांधी जी ने अपना जीवन सत्य, या सच्चाई की व्यापक खोज में समर्पित कर दिया। उन्होंने इस लक्ष्य को प्राप्त करने करने के लिए अपनी स्वयं की गल्तियों और खुद पर प्रयोग करते हुए सीखने की कोशिश की। उन्होंने अपनी आत्मकथा को सत्य के प्रयोग का नाम दिया। इसलिए युवा पीढी को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने महात्मा गांधी के जीवन से संबंधित कई प्रेरक प्रसंग भी सुनाए। 

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समिति के सह संयोजक धर्मेन्द्र शर्मा ने कहा कि ऐसे आयोजनों से देश की युवा पीढी को महात्मा गांधी जैसे व्यक्तित्व के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। उन्होंने महातमा गांधी के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि गांधी जी ने कहा है कि सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई लड़ने के लिए अपने दुष्टात्माओं, भय और असुरक्षा जैसे तत्वों पर विजय पाना है। गांधी जी ने अपने विचारों को सबसे पहले उस समय संक्षेप में व्यक्त किया जब उन्होंने कहा भगवान ही सत्य है बाद में उन्होने अपने इस कथन को सत्य ही भगवान है में बदल दिया। इस प्रकार, सत्य में गांधी के दर्शन है। 

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संगोष्ठी में कांग्रेस जिलाध्यक्ष साकेत बिहारी शर्मा ने कहा कि विज्ञान का युद्ध किसी व्यक्ति को तानाशाही , शुद्ध और सरलता की ओर ले जाता है। अहिंसा का विज्ञान अकेले ही किसी व्यक्ति को शुद्ध लोकतंत्रा के मार्ग की ओर ले जा सकता है। प्रेम पर आधारित शक्ति सजा के डर से उत्पन्न शक्ति से हजार गुणा अधिक और स्थायी होती है।

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कांग्रेस नेता डा. शिवचरन कुशवाह ने गांधीजी के ब्रह्मचर्य सिद्धांत की पालना करने के साथ ही शाकाहारी होना ब्रह्मचर्य में गहरी प्रतिबद्धता होने की शुरूआती सीढ़ी है, बिना कुल नियंत्राण ब्रह्मचर्य में उनकी सफलता लगभग असफल है। विकास अधिकारी राजेश लवानिया ने कहा कि गाँधी जी का मानना था कि अगर एक व्यक्ति समाज सेवा में कार्यरत है तो उसे साधारण जीवन की ओर ही बढ़ना चाहिए जिसे वे ब्रह्मचर्य के लिए आवश्यक मानते थे।

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