संजीवनी टुडे

पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह को मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

संजीवनी टुडे 25-06-2019 10:40:41

पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह को जयंती के मौके पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने याद कर श्रद्धांजलि दी है। मंगलवार की सुबह उन्होंने इस बारे में ट्वीट किया।


कोलकाता। पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह को जयंती के मौके पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने याद कर श्रद्धांजलि दी है। मंगलवार की सुबह उन्होंने इस बारे में ट्वीट किया। इसमें उन्होंने लिखा, "आज पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की जयंती है। इस मौके पर मैं उन्हें प्रेमपूर्वक याद कर श्रद्धांजलि दे रही हूं।" 

विश्वनाथ प्रताप सिंह भारत के आठवें प्रधानमंत्री थे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। उनका शासन एक साल से कम चला, दो दिसम्बर,1989 से 10 नवम्बर,1990 तक। 25 जून,1931 को उत्तर प्रदेश में जन्में विश्वनाथ प्रताप सिंह राजीव गांधी सरकार के पतन के कारण प्रधानमंत्री बने। विश्वनाथ प्रताप सिंह ने आम चुनाव के माध्यम से जो दिसम्बर,1989 को यह पद प्राप्त किया था। सिंह प्रधानमंत्री के रूप में भारत की पिछड़ी जातियों में सुधार करने की कोशिश के लिए जाने जाते हैं। 

1989 का लोकसभा चुनाव पूर्ण हुआ। कांग्रेस को भारी क्षति उठानी पड़ी। उसे मात्र 197 सीटें ही प्राप्त हुईं। विश्वनाथ प्रताप सिंह के राष्ट्रीय मोर्चे को 146 सीटें मिलीं। भाजपा और वामदलों ने राष्ट्रीय मोर्चे को समर्थन देने का इरादा ज़ाहिर किया। तब भाजपा के पास 86 सांसद थे और वामदलों के पास 52 सांसद। इस तरह राष्ट्रीय मोर्चे को 248 सदस्यों का समर्थन प्राप्त हो गया। 

वी.पी. सिंह स्वयं को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बता रहे थे। उन्हें लगता था कि राजीव गांधी और कांग्रेस की पराजय उनके कारण ही सम्भव हुई लेकिन चन्द्रशेखर और देवीलाल भी प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शरीक़ हो गए। ऐसे में यह तय किया गया कि वी.पी. सिंह की प्रधानमंत्री पद पर ताजपोशी होगी और चौधरी देवीलाल को उपप्रधानमंत्री बनाया जाएगा। 

प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने सिखों के घाव पर मरहम रखने के लिए स्वर्ण मन्दिर की ओर दौड़ लगाई। व्यक्तिगत तौर पर विश्वनाथ प्रताप सिंह बेहद निर्मल स्वभाव के थे और प्रधानमंत्री के रूप में उनकी छवि एक मजबूत और सामाजिक राजनैतिक दूरदर्शी व्यक्ति की थी। उन्होंने मंडल कमीशन की सिफारिशों को मानकर देश में वंचित समुदायों की सत्ता में हिस्सेदारी पर मुहर लगा दी। 27 नवम्बर,2008 को दिल्ली में उनका निधन हुआ था।

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