संजीवनी टुडे

सैकड़ों वर्षों से परम्परा आज भी कायम: इस गाँव में सिर्फ महिलाएं ही खेलती हैं होली, पुरुष करते हैं काम

संजीवनी टुडे 27-02-2020 15:15:09

वीरभूमि बुन्देलखंड के हमीरपुर जिले में होली पर्व पर सभी जगहों पर महिलाओं, पुरुषों और बच्चों में रंग, अबीर व गुलाल उड़ाकर होली खेलने की परम्परा है लेकिन यहां क्षेत्र में एक ऐसा गांव है जहां पूरे गांव की सैकड़ों महिलाओं की होली फाग निकालकर होती है।


हमीरपुर। वीरभूमि बुन्देलखंड के हमीरपुर जिले में होली पर्व पर सभी जगहों पर महिलाओं, पुरुषों और बच्चों में रंग, अबीर व गुलाल उड़ाकर होली खेलने की परम्परा है लेकिन यहां क्षेत्र में एक ऐसा गांव है जहां पूरे गांव की सैकड़ों महिलाओं की होली फाग निकालकर होती है। 

यह अनोखी परम्परा पिछले सैकड़ों सालों से चली आ रही है। हर साल की तरह इस बार भी पूरे गांव की महिलाएं ढोल मजीरे के साथ होली गाते हुये गांव के गली कूचों में फाग निकालकर होली खेलेंगी। बुन्देलखण्ड के हर इलाके में कोई भी एक ऐसा गांव नहीं है जहां महिलाएं अलग अंदाज से फाग निकालकर होली का पर्व मनाती हों बल्कि घरों में ही रहकर आने जाने वाले लोगों के साथ होली की मस्ती उठाती हैं, मगर हमीरपुर जिले में कुंडौरा ऐसा गांव है जहां पर महिलाओं की टोली फाग निकालकर पूरे गांव में भ्रमण करती हैं। 

कुंडौरा से जुड़े दरियापुर गांव की भी महिलाएं बड़ी संख्या में होली की फाग में शामिल होती हैं। बताया जाता है कि महिलाओं की फाग जिस समय गांव में निकलती है तब कोई भी पुरुष उन्हें देख नहीं सकता है। पुरुषों को या तो घरों में कैद रहना पड़ता है या फिर खेतों की ओर जाने का फरमान सुनाया जाता है। इस परम्परा का आगाज होली पर्व को होगा। 

गांव की देवरती कुशवाहा ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि पूरे बुन्देलखंड क्षेत्र में यहीं गांव है जहां होली त्यौहार में गांव की महिलाओं को सामूहिक रूप से होली खेलने का मौका मिलता है। ये परम्परा बदलते दौर में आज भी कायम है। इस वृद्ध महिला का कहना है कि शहरों और महानगरों में त्यौहारों की रौनक दिखायी ही नहीं देती है लेकिन यहां होली पर्व की रंगत देखते ही बनती है। गांव के बीएल कुशवाहा ने बताया कि आपसी मतभेद के बावजूद भी कुंडौरा गांव महिलाओं की अनोखी होली के लिये मिसाल बना हुआ है। महिलाओं के फरमान पर सभी गांव के बड़े और और जवान महिलाओं की फाग होली कार्यक्रम से पहले गांव से बाहर निकल जाते हैं। गांव के सभी लोग इस परम्परा को मिलकर आगे बढ़ाते हैं। 

अनोखी होली शुरु होने से पहले गांव से बाहर होते हैं पुरुष 
गांव के सरपंच अवधेश कुमार यादव एडवोकेट ने बताया कि यह प्रथा सैकड़ों साल पूर्व पूर्वजों ने शुरु की थी जो आज भी कायम है। उन्होंने बताया कि जिस समय महिलाओं की फाग गांव में भ्रमण करती है उस समय गांव के पुरुष गांव की गलियों से हटकर या तो घरों में कैद हो जाते हैं या फिर खेतों की ओर चले जाते हैं। गांव में पुरुषों का तभी आना होता है जब महिलाओं की फाग होली सम्पन्न हो जाती है। प्रधान ने बताया कि महिलाओं की फाग निकालने की कोई भी फोटो कैमरे से नहीं ले सकता है। इस पर भी प्रतिबंध है। यदि इस परम्परा का चोरीछिपे फोटो लेते कोई पकड़ा गया तो उस पर तगड़ा जुर्माना बोला जाता है। गांव के पुरुष और लड़के कार्यक्रम से पहले ही घरों में कैद हो जाते है अथवा गांव छोड़ बाहर खेतों की ओर चले जाते है। 

घूंघट वाली महिलाएं भी बनती है परंपरा का हिस्सा 
कुंडौरा गांव में महिलाओं की अनोखी होली का अहम हिस्सा बनने वाली श्रीमती कमलेश कुमारी सिंह, पूर्व प्रधान उपदेश कुमारी, बसंती विश्वकर्मा, गीता वर्मा, शकुन्तला सिंह, श्यामा पंडित, गौरा गुप्ता, सुदामा सिंह, संध्या सिंह, रश्मि सिंह, देवरती कुशवाहा, शिवदेवी आदि महिलाओं ने बताया कि उनको यह तो मालूम नहीं है कि इस गांव में महिलाओं की फाग क्यों निकाली जाती है लेकिन जब से वह बाबुल का घर छोड़ पिया के घर आयी है तभी से इस होली की परम्परा का हिस्सा बनी है। साठ से अस्सी साल की उम्र की वृद्धायें भी अनोखी होली खेलती है। पूरे गांव की महिलाओं के होली खेलने की परम्परा अपने आप में निराली है। हर साल धूमधाम के साथ होली की फाग में गांव की बुजुर्ग और नवयुवतियां भी हिस्सा लेती हैं। 

रामजानकी मंदिर से होली की फाग का होता है शुभारंभ 
गांव की वयोवृद्ध देवरती कुशवाहा ने बताया कि होली पर्व पर फाग का शुभारंभ गांव के रामजानकी मंदिर से होता है। मंदिर में फाग गाने के बाद रंग और गुलाल उड़ाते हुयी महिलाएं गांव के गली कूचों में घूमती है फिर इसके बाद खेरापति बाबा के मंदिर प्रांगण में फाग का समापन होता है। महिलाएं ढोल और मजीरा भी बजाती है। इस फाग होली में कुंडौरा से जुड़े दरियापुर गांव की महिलाएं भी शामिल होती हैं। गांव में महिलाओं की अनोखी होली के रंग शाम तक चलता है। सामूहिक रुप से सभी महिलाएं एक दूसरे को रंग अबीर लगाकर नाच भी करती है। बड़ी संख्या में घूंघट वाली महिलाएं भी परम्परा का हिस्सा बनती है और होली की मस्ती में डूब जाती है। होली की फाग सम्पन्न होने के बाद ही सभी महिलाएं होली के गीत गाती है।

यह खबर भी पढ़े: दिल्ली हिंसा पर बसपा सुप्रीमो मायावती बोलीं- केजरीवाल ने अपनी भूमिका नहीं निभाई

यह खबर भी पढ़े: कांग्रेस ने जज के रातों-रात तबादले को बताया शर्मनाक, ‘हिट एंड रन’ मामले से की तुलना

मात्र 289/- प्रति sq. Feet में जयपुर में प्लॉट बुक करें 9314166166

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

More From state

Trending Now
Recommended