संजीवनी टुडे

फसलों में लगने वाले कीटों से सुरक्षा को तैयार आग्नेयास्त्र और ब्रह्मास्त्र

संजीवनी टुडे 28-10-2020 15:48:30

इन दवाओं को घरलू नुस्खों से तैयार किया जाता है।


मीरजापुर। आग्नेयास्त्र, ब्रह्मास्त्र व मठास्त्र यह भारतीय सेना के किसी मिसाइल के नाम नहीं हैं बल्कि रासायनिक कीटनाशकों से मुकाबले के लिए छानबे ब्लॉक के रन्नोपट्टी गांव निवासिनी गीता देवी ने सब्जियों में लगने वाले कीटों को मारने के लिए इन्हीं नामों से दवा तैयार की है। 

गीता देवी पहले खुद इन दवाओं को घर पर तैयार करने का तजुर्बा सीखा, इसके बाद समूह की महिलाओं को इन कीटनाशकों और जैविक उर्वरकों को घर पर तैयार करने के लिए प्रशिक्षित कर रही हैं। ब्लॉक के पचास गांवों में यह प्रोजेक्ट संचालित किया जा रहा है। इन दवाओं को घरलू नुस्खों से तैयार किया जाता है। इन दवाओं का फसलों और सब्जियों में लगने वाले कीटों को मारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 

खास बात यह है कि इन दवाओं का स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। पूरी तरह से जैविक विधि से तैयार देशी दवाएं किसानों के बीच जहां लोकप्रिय हो रही है। वहीं रासायनिक कीटनाशकों के व्यवसाय को धीरे-धीरे सीमित करने में अहम भूमिका निभा रही है। इन दवाओं को तैयार करने में नीम की पत्ती,पपीता का पत्ता, अमरूद का पत्ता, धतूरा, बेहया का पत्ता, लहसुन, मिर्च, गोमूत्र, मट्ठा, नमक, चूना आदि का इस्तेमाल किया जाता है। 

आग्नेयास्त्र- सब्जी के पौधों में यदि कीट लग गए है और नीमास्तु का छिड़काव करने से कीट नहीं मर रहे हैं, तब आग्नेयास्त्र का इस्तेमाल किया जाता है। इसे तैयार करने की विधि बहुत ही आसान है। गीता देवी का कहना है कि लहसुन, मिर्च, नीम की पत्ती एक-एक किलोग्राम मात्रा में लेने के बाद दो लीटर गोमूत्र में तीनों का मिश्रण मिला कर तेज आंच पर तीन बार उबाले। इसके बाद ठण्डा होने के लिए रख दें। लगभग आठ घंटे बाद दवा तैयार हो जाती है। इसका पौधों पर छिड़काव करने से कीट मर जाते हैं और पौधा और फल पर भी कोई बुरा असर नहीं पड़ता है।

नीमास्तु- यह कीटनाशक नीम की पत्ती जरूरत के मुताबिक लेकर पीसने के बाद गोमूत्र में मिला कर चौबीस घंटे के लिए रख दी जाती है। इसके बाद इसे दवा के तौर पर फसलों में लगे कीटों को मारने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

ब्रह्मास्त्र- यह दवा पांच पौधों के पत्तों, मिट्टी और गोमूत्र के मिश्रण से तैयार की जाती है। कीटनाशक तैयार करने के लिए छतूरा, नीम, बेहया (सदाबहार), पीपल और खेत के मेड़ की मिट्टी व गोमूत्र को आपस में समानुपात में मिला कर मिट्टी के घड़े में आग पर उबाला जाता है। पूरा मिश्रण पांच बार उबाल आने के बाद आग से उतार कर ठण्डा होने के लिए रख दिया जाता है। लगभग चौबीस घंटे बाद एक लीटर दवा को दस लीटर पानी में मिला कर फसल पर छिड़काव करने से कीट मर जाते हैं।

नापेड और एफओआईएम विधि से तैयार कर रही जैव उर्वरकबीआरपी गीता देवी न केवल कीटनाशक तैयार करा रही है बल्कि नापेड और एफओआईएम विधि से जैविक उर्वरक भी तैयार करा रही है। नापेड विधि में जमीन पर चार गुणा चार का ईट की दीवार तैयार कराके उसी में कूड़ा, पशुओं का गोबर व मूत्र आदि डाल कर ढक दिया जाता है। लगभग तीन माह बाद ढक्कन हटाने के बाद तैयार उर्वरक का इस्तेमाल खेतों में किया जा सकता है। 

वहीं एफओआईएम विधि में जमीन में गड्डा खोद कर उसी में घर का कूड़ा, गोबर आदि प्रतिदिन डाला जाता है। लगभग पांच से छह माह बाद कूड़ा के सड़ जाने पर उसे जैविक उर्वरक के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहती है। साथ ही रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल भी सीमित किया जा सकता है। 

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