संजीवनी टुडे

‘चमकी’ को लेकर फरीदाबाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, पुख्ता इंतजाम

संजीवनी टुडे 22-06-2019 11:59:40

मुज्जफरपुर में एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम चमकी से सैकड़ों बच्चों की मौत के बाद फरीदाबाद का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट हो गया है। सिविल अस्पताल में बुखार के मरीजों खासकर बच्चों की विशेष तौर पर जांच की जा रही है।


फरीदाबाद। बिहार के मुज्जफरपुर में एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम ‘चमकी’ से सैकड़ों बच्चों की मौत के बाद फरीदाबाद का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट हो गया है। सिविल अस्पताल में बुखार के मरीजों खासकर बच्चों की विशेष तौर पर जांच की जा रही है। 

खास तौर पर 15 वर्ष के बच्चों में तेज बुखार, उल्टी, तेज रोशनी को सहन नहीं कर पाना जैसे लक्षणों पर स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों की पैनी नजर है। हालांकि अभी तक जिले में इस बीमारी से कोई भी बच्चा पीड़ित नहीं मिला है। फिर भी स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि बीके सिविल अस्पताल में इन दिनों इमरजेंसी वार्ड में काफी संख्या में बच्चे डायरिया, बुखार और हैजा बीमारियों के कारण भर्ती हैं लेकिन कुछ दिनों में भीषण गर्मी के बाद बारिश और उमस से मौसम दिमागी बुखार के पनपने के लिए अनुकूल होता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं हैं कि कहीं किसी भी बच्चे को एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम (चमकी) अपनी चपेट में आ जाएं।

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लोगों ने लीची से किया परहेज
चमकी बुखार का एक कारण लीची खाना होने की चर्चाओं के बाद लोगों ने लीची खानी बंद कर दी है। ऐसे में शहर के बाजारों और सड़क किनारे लीची विक्रेता ग्राहकों की बाट जोहते रहते हैं, लेकिन उनकी खरीदारी में भारी गिरावट आई है। बताया जाता है कि लीची की गुठली से निकलने वाले कीड़े से यह बुखार होता है। हालांकि इसकी अब तक पुष्टि नहीं की गई है।परंतु लोग लीची से परहेज करने लगे हैं।

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ जेएस तंवर का कहना है कि एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम(एइएस) कई वायरस से होता है। इससे बच्चों को दूसरी जगह जाने पर बीमारी फैलने की संभावनाएं होती हैं। ऐसे में सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी बीमारी को लेकर किया गया है। 

उन्होंने लीची उत्पादक क्षेत्रों में अधिक गर्मी और आद्रता के मौसम में दिमागी बुखार से पीड़ितों की संख्या बीते कई वर्षों से जानलेवा हो रही हैं जबकि इस बीमारी के कारणों का सही पता नहीं चल सका है। डॉ तंवर का कहना है कि 15 वर्ष तक के बच्चों में इस बीमारी का खतरा अधिक होता है।

जरूरी दवाएं मंगवाईं
बीके सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ विनय गुप्ता ने बताया कि विभागीय स्तर पर सभी जरूरी तैयारी कर ली गई हैं। जरूरी दवाएं मंगवा ली गई हैं। जरूरत पडऩे पर खास वार्ड भी तैयार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इन दिनों बच्चे डायरिया, बुखार से ज्यादा पीड़ित हो रहे हैं। इन बच्चों में दिखाई देने वाले सभी लक्षणों पर डॉक्टर पूरी निगरानी रख रहे हैं।

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