संजीवनी टुडे

लिंगानुपात मामले में प्रदेश में छठे स्थान पर आया फरीदाबाद

संजीवनी टुडे 26-02-2019 15:45:44


फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी बनने की ओर अग्रसर फरीदाबाद लिंगानुपात के सुधारने के मामले में प्रदेश में छठे स्थान पर आ गया है। जबकि जींद इस मामले में 927 एसआरबी के आंकड़े के साथ राज्य में अव्वल रहा। उल्लेखनीय है कि 1000 पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या पर लिंगानुपात की स्थिति का आंकलन किया जाता है | 

फरीदाबाद की उपलब्धि का श्रेय पूरी तरह से स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग में लगी कार्यकर्ताओं व आशाओं को जाता हैं। जिला फरीदाबाद में वर्ष 2015 के मुकाबले में शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के लिंगानुपात की स्थिति 117 तक सुधरी हैं, जो लिंगानुपात 2015 में 800 था, वह 2018 में बढक़र 917 हो गया। इतना ही नहीं वर्ष 2017 में भी इसमें सुधार दर्ज किया गया था, तब फरीदाबाद जिले का लिंगानुपात 907 पहुंच गया था। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग लोगों की सोच बदलने में कामयाब रहा है। क्योंकि लोग बेटियों के मुकाबले बेटों को ज्यादा काबिल मानते थे और गर्भ में ही कन्या भ्रूण हत्या जैसे पाप करने से भी पीछे नहीं हटते थे। सरकारी योजनाओं में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजनाओं और समय-समय पर चलाए गए जागरुकता कार्यक्रमों ने समाज में कन्या भ्रूण हत्या पर जैसे अभिशाप को खत्म करने में सराहनीय कार्य किया है। 

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आंकड़ों की बात करें तो राज्य में दूसरे नंबर पर रेवाड़ी, तीसरे पर नारनौल 898, चौथे पर कैथल 916 और पंचकूला 922 एसआरबी के साथ पांचवें स्थान पर है। जिले में ऐसे करीब 43 गांव हैं। इनमें लड़कियों का अनुपात 1000 के मुकाबले 800 से भी कम है। इनमें वालीपुर, नीमका, भुआपुर, गोठरा, पाखल, मांगर, फतेहपुर तगां, फिरोजपुर कलां, दयालपुर, चंदावली, सोतई, मच्छगर, खेड़ी खुर्द, जसाना, सिसढौला न्यू, अमीपुर, नचौली आदि शामिल हैं। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत ऐसे गांवों पर विशेष नजर रखी गई है। वहीं गांव राजपुर कलां, राजपुर फुलेरा, भूपानी ओल्ड, बदरौला, बेला, अलीपुर, मंझावली, चिरसी, अकबरपुर, महमूदपुर, अटाली, मौजपुर, नरियाला, जवां, अहमदपुर, फतेहपुर बिल्लौच, पलवली, किरावली, ददसिया, जाजरु, कैली, मोहला, सिकरौना, जखोपुर आदि गांवों में बेटियों की संख्या 800 से भी कम मिली थी।

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फरीदाबाद के सीएमओ डॉ. गुलशन अरोड़ा की माने तो जिले के ऐसे गांव, जहां लडक़ों के मुकाबले लड़कियों की संख्या बेहद कम है। प्रदेश में चल रहे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत अब ऐसे गांवों पर विशेष नजर रखी गई। फरीदाबाद जिले में 40 से अधिक ऐसे गांव हैं , जहां बेटियों की संख्या 800 से भी कम है। इन गांवों के हालातों में सुधार लाने के लिए विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाए गए हैं ।
 

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