संजीवनी टुडे

बागपत और मुजफ्फरनगर सीट पर लगी पूरे देश की निगाह

संजीवनी टुडे 22-05-2019 19:01:44


मेरठ। लोकसभा चुनाव की गुरुवार को मतगणना के बाद आने वाले परिणाम का दूरगामी असर पडे़गा।  केंद्र में बनने वाली सरकार की तस्वीर को साफ होगी ही, पश्चिमी यूपी के दो दिग्गजों के सियासी भाग्य का भी फैसला होगा। बागपत में रालोद महासचिव जयंत चौधरी और मुजफ्फरनगर में रालोद मुखिया अजित सिंह का सियासी अस्तित्व 23 मई को मतगणना के दौरान तय होगा। यहां पर गठबंधन और भाजपा के बीच कांटें की टक्कर है।
 
लोकसभा चुनावों के प्रथम चरण में 11 अप्रैल को पश्चिमी यूपी की मेरठ, बागपत, कैराना, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और सहारनपुर लोकसभा सीटों के लिए मतदान हुआ था। सबसे ज्यादा चर्चा में बागपत और मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट है। 2014 के चुनावों में रालोद को करारी हार का सामना करना पड़ा था। अपना सियासी अस्तित्व बचाने के लिए रालोद को सपा-बसपा से गठबंधन करना पड़ा। बागपत सीट को छोड़कर रालोद मुखिया अजित सिंह ने इस बार मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव लड़ा है। यहां पर उनका मुकाबला भाजपा उम्मीदवार डॉ. संजीव बालियान से हैं। जबकि बागपत सीट पर रालोद मुखिया के बेटे जयंत चौधरी ने भाजपा उम्मीदवार  डॉ. सत्यपाल सिंह को चुनौती दी है। एक्जिट पोल में वेस्ट यूपी की सभी सीटों पर भाजपा को बढ़त बताई जा रही है, लेकिन बागपत और मुजफ्फरनगर सीटों के परिणाम ने लोगों की धड़कनें तेज की हुई हैं।
 
मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव हार चुके हैं चरण सिंह
 
पश्चिमी यूपी का सबसे रोचक मुकाबला बागपत और मुजफ्फरनगर सीटों पर हो रहा है। मुजफ्फरनगर रालोद की परंपरागत सीट नहीं रही है। इस बार अजित सिंह ने बागपत छोड़कर मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ा है, इसलिए रालोद कार्यकर्ता की बेचैनी बढ़ गई है। इस सीट से अजित सिंह के पिता पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह भी चुनाव हार चुके हैं। ऐसे में अजित सिंह को लेकर रालोद कार्यकर्ताओं की धड़कनें तेज हो रही है। उनके सामने भाजपा से पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान है।
 
बागपत से विरासत बचाने को बेटे को लड़ाया
रालोद मुखिया अजित सिंह का यह आखिरी लोकसभा चुनाव माना जा रहा है। ऐसे में अपनी परंपरागत बागपत सीट से अजित सिंह ने अपने बेटे जयंत चौधरी को चुनाव मैदान में उतारा है। बागपत सीट से जयंत चौधरी के बाबा चौधरी चरण सिंह कई बार सांसद रह चुके हैं। जबकि पिता भी कई बार सांसद चुने गए हैं। दो बार 1998 और 2014 में रालोद मुखिया अजित सिंह को बागपत से हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में 2019 का लोकसभा चुनाव रालोद की विरासत बचाने की जंग भी मानी जा रही है। बागपत से जयंत चौधरी के मुकाबले केंद्रीय मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह भाजपा को फिर से जिताने की कोशिश में लगे हैं।
 
कांग्रेस ने बागपत और मुजफ्फरनगर लोकसभा सीटों पर रालोद उम्मीदवारों के सामने अपना कोई भी उम्मीदवार नहीं उतारा। इससे भाजपा और गठबंधन प्रत्याशियों के बीच आमने-सामने की कांटें की जंग है। कोई भी व्यक्ति हार-जीत को लेकर आसानी से कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। लोगों का साफ कहना है कि हार-जीत बहुत ही कम मतों के अंतर से होगी।
 
भाजपा ने चुनावों में झोंकी थी पूरी ताकत
 
बागपत और मुजफ्फरनगर सीटों पर फिर से कमल खिलाने में भाजपा ने कोई कसर नहीं छोड़ी। मेरठ और मुजफ्फरनगर लोकसभा सीटों की संयुक्त रैली को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया था। इसी तरह से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों लोकसभा क्षेत्रों में रैली की। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी चुनावी सभाएं करते रहे। भाजपा का मानना है कि बागपत और मुजफ्फरनगर का चुनाव हारते ही रालोद का सियासी अस्तित्व खत्म हो जाएगा। ऐसे में जाट वोटरों पर रालोद का एकाधिकार भी समाप्त हो जाएगा।
 
2014 में मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट का परिणाम
उम्मीदवार   पार्टी           मिले वोट
संजीव बालियान भाजपा        653391
कादिर राना बसपा     252241
वीरेंद्र सिंह  सपा    160810
पंकज अग्रवाल कांग्रेस   12,937
 
लोकसभा क्षेत्र में शामिल विधानसभाएं
 
मुजफ्फरनगर शहर, बुढ़ाना, जानसठ, चरथावल, सरधना
 
2014 में बागपत लोकसभा सीट का परिणाम
उम्मीदवार      पार्टी   मिले वोट
सत्यपाल सिंह     भाजपा           423475
गुलाम मोहम्मद     सपा 213609
अजित सिंह     रालोद          199516
प्रशांत चैधरी      बसपा           141743

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लोकसभा में शामिल विधानसभाएं
बागपत, बड़ौत, सिवालखास, छपरौली, मोदीनगर

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