संजीवनी टुडे

देश, समाज व स्वयं के हितों के लिए सबको एकसाथ आना होगा- प्रो. डीपी सिंह

संजीवनी टुडे 25-02-2020 20:16:21

बाबासाहेब भीमाराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के साथ एक संवादात्मक सत्र का हुआ आयोजन


लखनऊ। किसी भी विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता के लिए प्रशासन और अध्यापकों के साथ-साथ विद्यार्थियों का योगदान आवश्यक है। शैक्षिक क्रियाकलाप हों या फिर पाठ्येत्तर गतिविधियाँ, इसके स्तर को उत्कृष्ट बनाने में सभी के सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होती है। 

 उक्त बातें भीमाराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में मंगलवार को आंतरिक गुणवत्ता सुनिश्चय प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) द्वारा विद्यार्थियों के साथ एक संवादात्मक सत्र में वक्ताओं ने कही। इसका आयोजन विवि के 'भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी सभागार' में किया गया। 

 सत्र की शुरुआत आईक्यूएसी के डायरेक्टर प्रोफेसर डीपी सिंह के उद्बोधन से हुई। उन्होंने विश्वविद्यालय के विकास में विद्यार्थियों की भूमिका तथा एन.ए.ए.सी. (नैशनल एसेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल) तथा एन.आई.आर.एफ़. (नैशनल इंस्टीट्यूट रैन्किंग फ़्रेमवर्क) के रैंकिंग प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रक्रिया में विद्यार्थियों द्वारा एक फॉर्म भरकर विवि की सुविधाओं व शिक्षा गुणवत्ता के विषय में जानकारी दी जाती है। इसके आधार पर विश्वविद्यालय की एन.ए.ए.सी. व एन.आई.आर.एफ़. रैंकिंग निर्धारित होती है। इसलिए विवि की रैंकिंग सुधारने में हम सभी का सामूहिक प्रयास आवश्यक है। देश, समाज व स्वयं के हितों के लिए हम सभी को एकसाथ आना होगा।

प्रो. राम चंद्रा, डिप्टी डायरेक्टर, आई.क्यू.ए.सी. ने बताया कि ये अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का दौर है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से विद्यार्थियों को विश्व-स्तरीय शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कारवाई जा रही हैं, किन्तु फिर भी, विद्यार्थियों की राय जाने बिना ये अनुमान लगाना कठिन होगा कि विद्यार्थियों को जो सुविधाएं प्रदान हो रही है क्या वे उनसे संतुष्ट हैं। साथ ही इस आधुनिक दौर में हो रहे नित नए बदलावों के चलते यदि विद्यार्थियों को किसी अन्य सुविधा की आवश्यकता हो, तो उसका पता भी परस्पर संवाद से ही लगाया जा सकता है। प्रोफेसर बीएस भदौरिया,  डीन स्टूडेंट वेलफेयर ने भी विद्यार्थियों से चर्चा की व छात्रावासों से संबंधित जानकारी साझा की। 

प्रो. प्रीति सक्सेना ने प्रश्नोंत्तर के माध्यम से विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की गयी सुविधाओं के बारे में बताया ताकि पता लगाया जा सके कि कितने लोग विश्वविद्यालय द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रमों, योजना या प्रदत्त सुविधाओं से अवगत हैं। 

इसके बाद प्रो.सक्सेना और डॉ.नितेश कुमार ने मिल कर विद्यार्थियों को एन.ए.ए.सी. का स्ट्यूडेंट सैटिसफ़ैक्शन सर्वे फ़ॉर्म भरने की प्रक्रिया के बारे में बताया बायोटैक विभाग के छात्र भुवन भास्कर ने सुझाव दिया कि जिस प्रकार उनका डिपार्टमेन्ट सौंदर्य एवं स्वच्छता के लिए जाना जाता है, वैसी ही स्वच्छता हर विभाग में हो। एक अन्य छात्रा ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय के भीतर ई-रिक्शा चलाये जाएँ जिस से विश्वविद्यालय परिसर धुवाँ उत्पन्न करने वाले वाहनों की आवाजाही कम हो और परिसर प्रदूषण रहित बना रहे।

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