संजीवनी टुडे

चुनौती के बावजूद हर वर्ष आखिर छोर तक पहुंचता है पानी: चौधरी

संजीवनी टुडे 29-07-2019 16:58:16

विकास मंत्री हरीश चौधरी ने कहा है कि कच्ची नहरों को पक्का करने में चुनौती के बावजूद हर वर्ष आखिर छोर तक पानी पहुंचाया जाता है।


जयपुर। राजस्थान के सिंचित क्षेत्र विकास मंत्री हरीश चौधरी ने कहा है कि कच्ची नहरों को पक्का करने में चुनौती के बावजूद हर वर्ष आखिर छोर तक पानी पहुंचाया जाता है।

श्री चौधरी आज विधानसभा में विधायकों के पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि चम्बल सिंचित क्षेत्र की कच्ची नहरों को पक्का करने के काम में सबसे बड़ी चुनौती यह है वहां की मिट्टी की गुणवत्ता, बारिश एवं फसलों के कारण वर्ष में केवल तीन से चार माह ही काम हो पाता हैं। इसके अलावा न्यायालय के आदेश से पिछले दिनों बजरी पर रोक के कारण भी काम अपेक्षित गति से नहीं हो सका है। लेकिन इसके बावजूद हर वर्ष आखिरी छोर तक पानी पहुंचाया जाता है।

उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय बनी नई योजना की डीपीआर स्वीकृत नहीं हुई थी क्योंकि पूर्व स्वीकृत योजना ही अभी पूर्ण नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि अगर चम्बल की नहरों की योजना में स्वीकृत मद से अलग मद में राशि खर्च की गई तो इसकी जांच कराई जाएगी एवं दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। 

उन्होंने कहा कि नहर के रखरखाव के लिए मानव संसाधन की कमी का परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले सीएडी में कच्ची नहरों के सम्बन्ध में सीएडीडब्ल्यूएम योजना थी जिसे केन्द्र सरकार द्वारा एक अप्रैल 2017 से बंद कर दिया गया। अब किसी नई योजना में इस कार्य के लिए कोई राशि नहीं मिली है। 

इससे पहले विधायक चंद्रकांता मेघवाल के मूल प्रश्न के जवाब में श्री चौधरी ने बताया कि चम्बल सिंचित क्षेत्र की नहरें ज्यादातर कच्ची हैं। कच्ची नहरों में सीपेज पानी की मात्रा 2.50 क्यूमेक्स प्रति दस लाख वर्ग मीटर एवं पक्की नहरों में सीपेज पानी की मात्रा 0.80 क्यूमेक्स प्रति दस लाख वर्ग मीटर होती है। कच्ची नहरों को पक्की करने से 1.70 क्यूमेक्स प्रति दस लाख वर्ग मीटर की बचत सम्भव है। सीपेज रोककर चम्बल सिंचित क्षेत्र में कोटा, बून्दी व बारां जिले के लगभग 2.29 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में अन्तिम छोर तक के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए सिंचाई तंत्र के जीर्णोद्धार के कार्य करवाकर समयबद्ध तरीके से पानी पहुंचाने के लिए 1274 करोड़ रूपए की राशि की घोषणा वर्ष 2012-13 के बजट भाषण में की गई।

उन्होंने बताया कि यह कार्य प्रगतिरत है तथा कार्य सम्पादन से समांतर रूप से सीपेज में कमी आई है। 1274 करोड़ रूपए की योजना के तहत वर्ष 2012-13 से 2014-15 तक तीन चरणों में 852 करोड़ रूपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी की गई। उन्होंने इसका विवरण सदन के पटल पर रखा। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियों के आधार पर दाईं मुख्य नहर की वितरण प्रणाली के 10 कार्यों के लिए 463.88 करोड़ रूपए के कार्यादेश जारी किये गये जिसके विरूद्ध गत जून तक 131.32 करोड रूपए खर्च किये जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि बाईं मुख्य नहर प्रणाली के पांच कार्यों के लिए 243.58 करोड रूपए के कार्यादेश जारी किये गये जिसके विरूद्ध गत जून तक 88.56 करोड़ रूपये व्यय किये जा चुके हैं। इस प्रकार कुल कार्यादेश 707.46 करोड़ रूपये के विरूद्ध गत जून तक 219.88 करोड रूपये व्यय किये जा चुके हैं तथा 224 किलोमीटर नहरों को पक्का किया जा चुका है। 

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