संजीवनी टुडे

झुंझुनू में पुराने प्रत्याशी बिगाड़ेगें दोनो दलो का समीकरण

संजीवनी टुडे 21-04-2019 20:10:43


झुंझुनू। ना किसी पार्टी के प्रत्याशी,ना किया नामांकन फिर भी लोकसभा में उम्मीदवारी! जी हां हम बात कर रहे हैं संसदीय क्षेत्र झुंझुनू की। झुंझुनू संसदीय क्षेत्र में मुख्य मुकाबला कांग्रेस व भारतीय जनता पार्टी के मध्य होने जा रहा है लेकिन फिर भी पूर्व में आमने -सामने चुनाव लड़ चुके दो ऐसे उम्मीदवार चुनाव को रोचक बना रहे हैं जो वर्तमान चुनाव में ना किसी पार्टी के प्रत्याशी हैं ना ही उन्होंने नामांकन किया है। फिर भी प्रत्याशियों की हार-जीत उन्ही पर निर्भर बताया जा रहा है। दोनों नेता चुनाव मैदान से तो बाहर है मगर उनकी प्रतिष्ठा चुनावी हार जीत से जुड़ी हुई है। दोनों ही अपनी जीत सुनिश्चित करना चाहते है, चाहे वह अपनो को हराकर ही मिले। 

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इन दोनों की जिलेभर में ही नहीं अपितु पूरे शेखावाटी क्षेत्र में जोरों से चर्चा हा रही है। इनमें से एक है निवर्तमान भाजपा सांसद संतोष अहलावत जो 2014 के चुनाव में भाजपा की टिकट पर झुंझुनू में पहली दफा कमल खिलाने में कामयाब हुई थी। वहीं दूसरी है गत लोकसभा चुनाव में कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ कर हार चुकी डा.राजबाला ओला। डा. राजबाला ओला के पति बृजेन्द्र ओला वर्तमान में झुंझुनू क्षेत्र से कांग्रेस के तीसरी बार विधायक बने हैं। बृजेंद्र ओला के पिता शीशराम ओला झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार सांसद बने व केन्द्र की कांग्रेस नीत सरकार में केबीनेट मंत्री रहे थे। शीशराम ओला आठ बार विधायक व राज्य सरकार में वर्षो मंत्री भी रहे थे।

2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व उनके निधन के बाद उनकी पुत्रवधू डा.राजबाला ओला को कांग्रेस पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया था। जिसमें राजबाला ओला भाजपा की मोदी लहर में झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी संतोष अहलावत से चुनाव हार गई थी। डा.राजबाला ओला इस बार फिर वह झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से अपनी दावेदारी जता रही थी। लेकिन पार्टी ने उन को फिर से टिकट ना देकर सूरजगढ़-पिलानी से विधायक रहे श्रवण कुमार पर अपना दांव खेला है।

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भाजपा ने भी निवर्तमान सांसद संतोष अहलावत का टिकट काटकर मंडावा से दूसरी बार विधायक बने नरेंद्र कुमार खीचड़ को चुनावी मैदान में उतारा है। अब चुनाव मैदान में दोनों ही मुख्य दलो के नए प्रत्याशी होने से भाजपा और कांग्रेस दोनों का गणित बिगडऩे की पूरी संभावना लगती है। कहने को तो कांग्रेस की डा.राजबाला ओला व भाजपा की संतोष अहलावत दोनों ही अपनी पार्टी में तो बनी हुई है, लेकिन अपनी-अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के लिए कहीं सक्रिय नजर नहीं आ रही है। जनचर्चा है कि टिकट कटने के कारण इन दोनों नेत्रियों द्वारा अपनी अपनी पार्टी प्रत्याशियों के साथ भीतरघात की संभावना व्यक्त की जा रही है। दोनो ही अपना टिकट कटने का दर्द अभी तक नहीं भुला पायी है।

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