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डूंगरपुर उपद्रव : भाजपा ने दो वरिष्ठ अधिकारियों पर लगाया आरोप

संजीवनी टुडे 29-09-2020 17:30:36

भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार खुले आम दो सरकारी अधिकारियों का नाम लेते हुए जनजाति क्षेत्र में हुई हिंसा में उनके लिप्त होने का आरोप लगाया है।


उदयपुर। भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार खुले आम दो सरकारी अधिकारियों का नाम लेते हुए जनजाति क्षेत्र में हुई हिंसा में उनके लिप्त होने का आरोप लगाया है। मंगलवार को यहां उदयपुर के सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता कर भाजपा पदाधिकारियों ने पिछले दिनों हुए डूंगरपुर उपद्रव के तार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक जुड़े हुए बताए और यह भी कहा कि वहां के लोग यहां आए और यहां के लोग भी वहां प्रशिक्षित होकर आए हैं ताकि इस क्षेत्र में जातिगत वर्ग संघर्ष की स्थिति उत्पन्न कर क्षेत्र को अस्थिर किया जा सके। भाजपा ने पूरे मामले पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तुरंत कार्रवाई की मांग की है, साथ ही जरूरत पडऩे पर केन्द्र सरकार से सीबीआई जांच के लिए भी आग्रह करने की बात कही है। 

भाजपा के प्रदेश महामंत्री व विधायक मदन दिलावर ने शिक्षक भर्ती में रिक्त रहे अनारक्षित पदों को आरक्षित एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों से भरने की मांग की आड़ में हुई हिंसा को सुनियोजित षडय़ंत्र करार दिया है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया के निर्देश पर बनी तीन सदस्यी कमेटी जिसमें दिलावर सहित उदयपुर सांसद अर्जुन मीणा व चित्तौडग़ढ़ सांसद सीपी जोशी शामिल हैं, ने दौरे के बाद मंगलवार को उदयपुर में मीडिया से बात की। 

दिलावर ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि इस पूरे हिंसात्मक घटनाक्रम के पीछे बाहरी ताकतें भी रहीं और बाहर से प्रशिक्षित होकर आए स्थानीय कतिपय लोग भी शामिल रहे। उन्होंने स्थानीय स्तर पर एक वरिष्ठ आरएएस अधिकारी और पुलिस अधिकारी पर आरोप लगाया कि सरकार ईमानदारी से जांच करेगी तो उनकी भूमिका भी इसमें नजर आएगी। स्थानीय लोगों ने इन दोनों अधिकारियों को इस क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियों को समर्थन देने, आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने जैसे कृत्यों में शामिल बताया है। साथ ही भारतीय ट्रायबल पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वेलाराम घोघरा सहित सीमलवाड़ा के अध्यापक भंवर परमार, डूंगरपुर के कुंतीलाल आदिवासी, मणिलाल गरासिया, बीटीपी विधायक राजकुमार रोत, प्रतापगढ़ के कांतिलाल निनामा की भी पिछले छह महीनों की गतिविधियों की जांच की मांग की है। 

प्रशासनिक अधिकारी पर आरोप लगाने पर पत्रकारों ने सवाल उठाया कि उनकी पत्नी को भाजपा ने विधायक का टिकट दिया था और आज भाजपा ही आरोप लगा रही है, तब दिलावर ने कहा कि अपराध जब भी सामने आए कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वह मदन दिलावर ही क्यों न हो। दिलावर ने पिछले दिनों मंदिरों की मूर्तियां तोडऩे और ध्वजा हटाकर बीटीपी के झंडे लगा दिए जाने को भी सामाजिक विद्वेष वाली विचारधारा बताते हुए बीटीपी पर कार्रवाई की मांग की। दिलावर ने कहा कि यहां का आम आदिवासी इनसे कोई सरोकार नहीं रखता। वह खुद इस बात का विरोध कर रहा है कि उन्हें राम-राम बोलने से मना क्यों किया जा रहा है।

दिलावर ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्यों हुआ कि जहां बीटीपी के विधायक हैं वहां कोई हिंसा नहीं हुई, गैर बीटीपी विधायक वाले क्षेत्रों में गैर आदिवासियों पर हमले किए गए और जमकर लूटपाट व आगजनी की गई। अभ्यर्थियों के आंदोलन को हिंसात्मक बना दिया गया। जो फायरिंग में मारे गए वे तो अभ्यर्थी ही नहीं थे। वे इसमें कैसे शामिल हो गए। 

बाहरी ताकतों पर किए गए सवाल पर दिलावर ने बताया कि उनके दौरे में यह भी सामने आया है कि गुजरात की बबीता कश्यप, छत्तीसगढ़ की बरखा लखारा और उदयपुर के डीएस पालीवाल नामक व्यक्ति भी यहां नक्सल विचारधारा के न केवल बीज बो रहे हैं, बल्कि क्षेत्रवासियों के अनुसार कई युवाओं को भ्रमित कर उन्हें हथियारों का प्रशिक्षण भी दिया गया है। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में कार्य कर रहे एनजीओ व कतिपय मुस्लिम संगठनों की भी जांच की जरूरत बताई। भाजपा ने आम जनता के हुए नुकसार की भरपाई राज्य सरकार से तुरंत करने की मांग की है।

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