संजीवनी टुडे

स्मार्ट सिटी में कुत्तों का आतंक, प्रतिदिन 200 लोगों को बना रहे है शिकार

संजीवनी टुडे 23-02-2019 22:27:12


फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी फरीदाबाद के लोग इन दिनों आवरा कुत्तों के आतंक से बेहद परेशान है। पॉश सेक्टरों, कालोनियों व मुख्य सडक़ों पर घूमने वाले कुत्ते कब किसे अपना शिकार बना ले, यह कहना मुश्किल है। एक अनुमान के अनुसार प्रतिदिन करीब 200 लोगों को कुत्ते अपना शिकार बना रहे है। कुत्तों के आतंक के चलते लोग इस कद्र भयभीत होने लगे है कि यहां कुत्तों का झुंड देखते है, वहां से गुजरने की बजाए अपना रास्ता बदल देते है। औसतन हर माह 1500 लोगों को कुत्ते काट रहे है और पिछले दो साल में कुत्ते के काटने से दो लोगों की मौतें हो चुकी है। परंतु इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन इस मामले में चुप्पी साधे हुए है।

अगर समय रहते इन आवरा कुत्तों पर नकेल नहीं कसी गई तो इनके शिकार लोगों की तादाद और बढ़ जाएगी। गौरतलब है कि फरीदाबाद एनआईटी, बल्लभगढ़, ओल्ड फरीदाबाद व सराय ख्वाजा के साथ-साथ पॉश सेक्टरों में आवरा कुत्ते आमतौर पर देखने को मिलते है परंतु कुछ समय से यह कुत्ते पूरी तरह से उग्र हो चुके है। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी कुत्ते के शिकार लोगों की तादाद निरंतर बढ़ रही है। जिले के के सिविल अस्पताल बादशाह खान में इन दिनों कुत्तों के काटे जाने के लोगों की लम्बी कतारें देखी जा सकती है। प्रतिदिन कुत्ते काटे जाने के 150 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे है। यदि निजी अस्पतालों का आंकड़ा भी जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा 200 पार कर जाएगा और ठंड में तो यह संख्या और बढ़ जाती है। प्रतिदिन इतनी बड़ी संख्या में लोग कुत्तों के काटने के शिकार हो रहे है फिर भी निगम और पशु चिकित्सा विभाग इस पर कार्रवाई नहीं कर रहा।

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वहीं नसबंदी के लिए आने वाला खर्च हवा हवाई हो रहा है। वर्ष 2018 में करीब 22,500 लोगों को कुत्तों ने अपना शिकार बनाया, जबकि 2017 में यह आंकड़ा 21,574 था। वैसे भी प्रदेश में कुत्तों के काटे जाने के मामलों में फरीदाबाद जिला पहले स्थान पर है और दूसरे स्थान पर गुरुग्राम है। गुरुग्राम में हर साल 18 हजार लोग कुत्तों के हमलों के शिकार होते हें। सिविल अस्पताल बादशाह खान के फिजिशयन डा. योगेश गुप्ता की माने तो कुत्ते के काटने के रोगी को पानी से डर लगता है। इसे हाईड्रोफोबिया हो जाता है। कुत्ते के काटने पर उसका लार, खून में मिल जाता है और यह धीरे-धीरे मस्तिष्क में पहुंच जाता है। कुत्तों से होने वाले रैबीज रोग के जहर का असर मस्तिष्क पर पड़ता है।

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चिकित्सकों की माने तो सावधानी व सतर्ककता ही सबसे बड़ा उपाय है। चिकित्सकों के अनुसार जब किसी को कोई भी कुत्ता काट ले तो उसके चौबीस घण्टे के बाद एआरबी का इंजेक्शन लगवा लेना जरुरी है। बीके अस्पताल में गुरुग्राम ड्रग वेयर हाऊस से 13 जनवरी से एंटी रैबीज इंजेक्शन की सप्लाई नहीं हुई है, जिसके चलते लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बीके अस्पताल के पीएमओ डा. सुशील माही का कहना है कि प्रदेशभर में एंटी रैबीज इंजेक्शन सप्लायर के पास भी इंजैक्शन की सप्लाई खत्म हो चुकी है। सरकार ने अनुबंधित फर्म को रैबीज इंजेक्शन सप्लाई के आदेश दिए हैं। बाहर से खरीदे जाने के लिए भी सरकार ने हमें कह दिया है, लेकिन इमरजेंसी दवा की डोज पूरी नहीं मिल पाने के कारण परेाशानी आ रही है। हमने ड्रग वेयर हाऊस को भी इंजेक्शन आपूर्ति के लिए लिखा है।

 

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