संजीवनी टुडे

राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी समझाइश से हुआ कई मामलों का निस्तारण

संजीवनी टुडे 13-07-2019 15:55:57

राजस्थान उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति द्वारा शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें आपसी राजीनामे से कई मामलों का निस्तारण हुआ।


जोधपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति द्वारा शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें आपसी राजीनामे से कई मामलों का निस्तारण हुआ। 

राजस्थान उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के सचिव देव कुमार खत्री ने बताया कि लोक अदालत में निचली कोर्ट से संबंधित करीब 19 हजार 564 मामले निस्तारण के लिए रखे गए। इनमें 5 हजार 780 प्री लिटिगेशन के मामले भी शामिल है। इसी तरह जिला न्यायालय क्षेत्र के अधीनस्थ तालुका विधिक सेवा समिति के फलोदी, बालेसर, बिलाड़ा, पीपाड़, ओसियां व जिला मुख्यालय पर न्यायालयों में भी लोक अदालत का आयोजन किया गया। इन लोक अदालतों में आपसी राजीनामे से कई प्रकरणों का निस्तारण किया गया। 

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जोधपुर महानगर के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश नरसिंहदास व्यास ने बताया कि यह राष्ट्रीय लोक अदालत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार राजीनामा योग्य समस्त प्रकृति के प्रकरणों के निस्तारण के लिए रखी गई। जिला एवं सेशन न्यायालय जोधपुर महानगर जोधपुर परिसर में आयोजित इस लोक अदालत के सुचारू क्रियान्वयन के लिए हाईकोर्ट में 5 बैंच व निचली अदालतों में 23 बैंच का गठन किया गया था।

लोक अदालत में दोनो पक्षों की आपसी सहमति व राजीनामे से सौहार्दपूर्ण वातावरण में पक्षकारान की रजामंदी से कई विवाद निपटाए गए। बता दे कि लोक अदालत के माध्यम से शीघ्र व सुलभ न्याय मिलता है तथा इसकी कोई अपील नहीं होती है। मामलों के निस्तारण पर कोर्ट फीस पक्षकारों को लौटाई जाती है तथा प्रकरणों में अन्तिम रूप से निपटारा होता है। 

राष्ट्रीय लोक अदालत में हाईकोर्ट में न्यायाधिपति संदीप मेहता, अरूण भंसाली, पुष्पेन्द्रसिंह भाटी, दिनेश मेहता, मनोज कुमार गर्ग और विनीत कुमार माथुर की अध्यक्षता में बैंच गठित की गई थी। वहीं पूरे न्यायालय परिसर में कुल 23 बैंचों की स्थापना की गई। इसमें पीठासीन न्यायिक अधिकारियों ने अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। प्रत्येक बैंच के लिए एक अधिवक्ता सदस्य के रूप में उपस्थित थे।  

राष्ट्रीय लोक अदालत में दाण्डिक शमनीय अपराध, धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम के मामले, बैंक रिकवरी मामले, पारिवारिक विवाद, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण मामले, बिजली व पानी के मामले, मजदूरी, भत्ते और पेंशन भतों से संबंधित मामलों तथा सभी प्रकार के प्री-लिटिगेशन के मामले जो अभी न्यायालय के समक्ष नहीं आए है आदि को रखा गया।

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