संजीवनी टुडे

कानपुर ओएफसी में बनी धनुष तोप जंग में दुश्मनों को देगी मात

संजीवनी टुडे 26-06-2019 21:53:46

अब भारतीय सेना बोफोर्स तोप से भी अधिक मारक क्षमता वाली स्वदेशी तोप ‘‘धनुष’’ से लैस होने जा रही है।


कानपुर। अब भारतीय सेना बोफोर्स तोप से भी अधिक मारक क्षमता वाली स्वदेशी तोप ‘‘धनुष’’ से लैस होने जा रही है। बुधवार को कानपुर स्थित आयुध कारखाने फील्ड गन फैक्ट्री ने दो तोपों की पहली खेप को सेना में शामिल होने के लिए रवाना किया गया। ओएफसी में निर्मित भारतीय धनुष को पाक से सटे राजस्थान के सीमावर्ती इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजायन किया गया है।कुछ याद है आपको, नब्बे के दशक में स्वीडन में बनी बोफोर्स तोपों ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया था और राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि कारगिल युद्ध में इन विदेशी तोपों ने अपनी सार्थकता सिद्ध की तो उनके और अधिक उन्नत स्वरूप को देश के भीतर तैयार करने की कवायद शुरू की गयी। यह जिम्मेदारी कानपुर स्थित फील्ड गन फैक्ट्री के हिस्से में आयी। यहां के रक्षा वैज्ञानिकों, इन्जीनियरों और कर्मचारियों की दिन रात मेहनत से एक तोप तैयार की गयी, जिसका तकनीकी नाम रखा गया ‘‘पी-वन 55’’। इस तोप का जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री में परीक्षण हुआ और भारतीय सेना ने इसकी मारक क्षमता को देखते हुए इसे नया नाम दिया गया ‘‘धनुष’’। आखिर जब तकनीकी स्वदेशी है तो नाम भी पूरा हिन्दुस्तानी होना चाहिये।

धनुष तोप की बैरल बोफोर्स की तुलना में 877 मिलीमीटर अधिक बड़ी है। सेमी आटोमैटिक स्वभाव के कारण अगर यह एक-एक करके 30 सेकेण्ड के अन्तराल से लगातार गोले दाग सकती है। लेकिन इसे बस्ट मोड में चलाया जाए तो पन्द्रह सेकेण्ड के भीतर तीन गोले दुश्मन की छाती पर जा गिरेगें। मारक क्षमता के मामले में यह बोफोर्स से कई किलोमीटर आगे है। बोफोर्स की मार 28 किलोमीटर रेन्ज की थी, लेकिन ओएफसी कानपुर में तैयार धनुष तोप की इससे 10 किलोमीटर अधिक 38 किलोमीटर तक पहुंचकर दुश्मनों के कैम्पों को निस्ते-नाबौत करने में सक्षम है। इस देशी बोफोर्स की सबसे अहम बात यह भी है कि इसमें एक भी विदेशी पुर्जा नहीं लगाया गया है। स्वीडन से आयातित बोफोर्स जहां मैनुअल पद्धति से काम करती थी, वहीं धनुष इलेक्ट्रानिक सर्विलॉस सिस्टम से आपरेट होगा। अपने धनुष की लक्ष्य पर निशाना साधने की क्षमता भी बोफोर्स से 25 प्रतिशत बेहतर है। यानि जिस टारगेट पर पहला गोला गिरेगा, दूसरा और तीसरा गोला भी वहीं गिरेगा। बस्ट मोड में भी गोले दागे जाने पर यह अपने निशाने से चूकेगी नहीं। 

जारी रहेगा तोपों का बनाना 
फील्ड गन फैक्ट्री के वरिष्ठ महाप्रबन्धक अनिल कुमार के अनुसार धनुष कि कुछ और भी अहम खूबियां हैं। उन्होंने बताया कि यह चाहे रेतीले मैदान हों, नदी, नाले या फिर पहाड़ की चोटी, हर जगह मोर्चा लेने में सक्षम होगी। चीते जैसी फुर्ती से तीन मिनट में आधा किलोमीटर तक खिसक कर दोबारा गोला दाग सकेंगी।उन्होंने बताया कि सेना को फील्ड गन फैक्ट्री ने इसके पहले परीक्षण के तौर पर छह तोपें सौंपी थी, जिनमें यह पूरी तरह खरी उतरी थीं। इसके बाद आयुध निर्माणी बोर्ड को 114 तोपें बनाने का बल्क आर्डर मिल मिला। तोपों का उत्पादन इसके बाद भी नहीं रूकेगा, क्योंकि तीन सौ तोपों का अगला आर्डर भी पाइप लाइन में है। इस तरह दो खेप में 314 गन बनायी जायेंगी। रक्षा विभाग देशकाल की परिस्थितियों के मुताबिक इसका आर्डर आगे भी बढ़ा सकता है।

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