संजीवनी टुडे

माघ मेले में श्रद्धालुओं को नहीं मिलेगी शटल जैसी सेवा

इनपुट- यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 24-12-2019 13:28:28

सरस्वती के तट पर प्रतिवर्ष लगने वाले माघ मेला 2020 में अर्द्ध कुंभ 2019 की तरह श्रद्धालुओं को शटल बस जैसी सेवा नहीं मिलेगी।


प्रयागराज। तीर्थराज प्रयाग में पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अदृश्य रूप से बहने वाली सरस्वती के तट पर प्रतिवर्ष लगने वाले माघ मेला 2020 में अर्द्ध कुंभ 2019 की तरह श्रद्धालुओं को शटल बस जैसी सेवा नहीं मिलेगी।

प्रयागराज परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक टी एस बीशेन ने मंगलवार को कहा कि माघ मेले में शटल बसें नहीं चलेंगी क्योंकि उसके लिए कोई बजट नहीं होता। अर्द्ध कुंभ और कुंभ बड़ा मेला होने के कारण इसके लिए बजट की व्यवस्था होती है इसलिए उस दौरान श्रद्धालुओं को यह व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है।

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उन्होने बताया कि शटल बसों की जगह 80 सिटी बसें चलेंगी जिसकी सेवा लेने पर श्रद्धालुओं को भुगतान करना होगा। माघ मेला और अर्द्ध कुंभ मेले में बड़ी संख्या में दुनिया के कोने-कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं जबकि माघ मेला में उतनी बड़ी तादाद में लोग नहीं पहुंचते।

गौरतलब है कि कुंभ मेले में श्रद्धालुओं को पहुंचाने वाली रोडवेज की शटल बसों में छोटे-बड़े स्नान से एक दिन पहले और एक दिन बाद तक कुल 18 दिनों तक फ्री सेवा थीं। अन्य दिनों में शटल बसों से सफर करने पर श्रद्धालुओं को किराया देना पड़ा था।

पौष पूर्णिमा 10 जनवरी से शुरू होने वाले माघ मेला में मात्र 16 दिन रह गये। मेला के निकट आने के साथ ही साधु-संन्यासियों के कदम भी गंगा की ओर बढऩे लगे हैं। इनमें कई के अपने ठिकाने हैं तो कुछ मठ और आश्रमों में रुक कर धार्मिक कार्यों की रूपरेखा बनाने में जुट गए हैं। संगम की रेती एक बार फिर आबाद होने लगी है।

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तीर्थ क्षेत्र में साधु-संन्यासियों की उपस्थिति हर समय बनी रहती है। हालांकि हर साल जनवरी माह में लगने वाले माघ मेले में संगम तट पूरी तरह से धर्ममय हो उठता है। जगह-जगह प्रवचन, भंडारे, सांस्कृतिक आयोजन की धूम के साथ साधु-संन्यासी भी अपने-अपने शिविरों मेें धूनी रमाते हैं।

त्रिवेणी बांध से लेकर संगम नोज और महावीर मार्ग पर साधु-संन्यासी समूह में पहुंच रहे हैं। संन्यासियों ने बताया कि वह अपने मठ के आश्रमों में ठहरेंगे, माघ मेले में शिविर समेत अन्य धार्मिक आयोजन की तैयारी में कई दिन लगते हैं इसलिए वह पहले से आ गए हैं।

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