संजीवनी टुडे

बेदखली रोकने के लिए अध्यादेश लाने की मांग, खनन के खिलाफ किसानों का आंदोलन

संजीवनी टुडे 23-02-2019 17:03:07


रायपुर। वन अधिकार अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने सरकार से तुरंत जंगलों से बेदखली रोकने के लिए सरकारी अध्यादेश लाने की मांग की है। गैरसरकारी संस्था ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अभूतपूर्व बताया, लेकिन इस बात का भी आरोप लगाया कि सरकार ने कोर्ट में जानबूझकर सही तर्कों को सामने नहीं रखा। संस्था ने जंगल और जमीनों की बेदखली होने से रोकने के खिलाफ सरकार से जल्द से जल्द अध्यादेश लाने की मांग की है। 

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वहीं दूसरी तरफ, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति और छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन मिलकर पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों की ग्रामसभाओं को प्रभावी अधिकार देने की मांग करते हुए 'पेसा' एक्ट व वनाधिकार मान्यता कानून की मूल आस्था के तहत कार्य करने की मांग की है। 

संस्था के संयोजक आलोक शुक्ला ने शनिवार को इस बारे में बताया कि ग्राम सभाओं को वनाधिकार और पेसा कानून के तहत सरकार ने कई अधिकार दिए हैं। लेकिन कार्पोरेट घरानों को अधिक से अधिक मुनाफा पहुंचाने के लिए सरकार ग्राम सभाओं पर हमेशा दवाब बनाती रहती है। उन्होंने बताया कि इसके खिलाफ कई संस्थाएं मिलकर कोरबा जिले में 24 फरवरी को किसानों का विशाल सम्मेलन करने जा रही है। यह सम्मेलन हसदेव अरण्य क्षेत्र में हो रहा है, जिसमें विभिन्न कोल ब्लॉक प्रस्तावित हैं। 

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उन्होंने कहा कि ग्रामसभा हमेशा ही कारपोरेट घरानों का विरोध करती रही है। क्योंकि हसदेव इलाका एक सघन वन क्षेत्र है और खनन के लिए यह प्रतिबंधित क्षेत्र है। बावजूद यहां खनन जारी है। इस सम्मेलन में राज्य के आदिम जाति अनुसूचित जाति विकास मंत्री प्रेमसाय सिंह भी मौजूद रहेंगे।

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