संजीवनी टुडे

एटीएम खाली होने से ग्राहक परेशान, मशीनों पर नहीं हो रही पासबुक प्रिंट

संजीवनी टुडे 07-03-2019 18:39:52


गुना। जिलेभर की बैंकों में लगे एटीएम शाम होते ही खाली हो रहे हैं। इसके अलावा कई बैंकों के एटीएम खराब हैं या फिर केश न होने की समस्या सुबह से ही शुरू हो जाती है। वहीं पासबुक प्रिंट करने वाली मशीनों में भी खराबी होने से ग्राहकों को सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इन दिनों बैंकों में सुविधाओं के अभाव से ग्राहक खासे परेशान हैं। लेकिन बैंक अधिकारी इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय पर सबसे अधिक एटीएम भारतीय स्टेट बैंक से जुड़े हैं। इसके अलावा निजी बैंकों के पास अपने एक या दो एटीएम हैं। वहीं ग्रामीण बैंकों के पास एटीएम नहीं हैं। जिन बैंकों के पास एटीएम है, उनमें केश की समस्या से ग्राहक परेशान हैं। भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा बस स्टैंड, व्यवसायिक शाखा और कलेक्ट्रेट स्थित ब्रांच में सबसे ज्यादा मशीनें लगी हैं। ग्राहकों के अनुसार दिन में कई बार उन्हें एटीएम पर केश न उपलब्ध होने की समस्या का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं व्यवसायिक शाखा में लगे एटीएम में से दो खराब हैं और अधिकांश खराब ही रहते हैं। इनके डिस्प्ले पर 'आउट ऑफ ऑर्डर लिखा रहता है। जबकि इस ब्रांच पर दिनभर में पांच सैकड़ा से अधिक ग्राहक एटीएम उपयोग करने के लिए पहुंचते हैं।

इसी तरह बस स्टैंड स्थित मुख्य शाखा में भी लोग पैसे निकालने पहुंचते हैं तो यहां बने ई-सेवा केंद्र पर लगी दो एटीएम मशीनों में से एक में अधिकांश समय राशि नहीं होती है। दूसरी मशीन पर, जिस पर डिपॉजिट भी हो सकता है। यहां लोगों की कतारें अधिकांशत: पैसे जमा करने के लिए लगी रहती है। इसकी वजह से ग्राहकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। इसी तरह कलेक्ट्रेट ब्रांच में लगे दो एटीएम में से एक पर राशि उपलब्ध न होने की समस्या अधिकांश समय बनी रहती है। हैरानी की बात यह है कि ग्राहकों की इस समस्या को लेकर बैंक गंभीर नहीं हैं।

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राशि फंसने के बाद नहीं होती सुनवाई

एटीएम में राशि जमा करने के दौरान राशि तकनीकी खामी के चलते फंसने की समस्या भी ग्राहकों को परेशान कर रही है। दरअसल, बैंकों में लगने वाली लम्बी लाइनों से होने वाली परेशानी से बचने के लिए ग्राहक मशीन से पैसा जमा करना अधिक पसंद करते हैं। हालांकि इस सुविधा का लगभग 25 रुपये चार्ज भी उन्हें देना पड़ता है, जो डिपॉजिट होने वाले खाते से डेबिट हो जाता है। लेकिन मशीन से राशि डिपॉजिट करने के दौरान यदि तकनीकी खामी के चलते राशि फंस जाए तो इस समस्या के लिए ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यानि राशि फंसने के बाद बैंक ग्राहक को एक फॉर्म उपलब्ध करा देता है, जिसे भरकर वह बैंक में जमा कर दे। लेकिन इसके बाद कब राशि और कब ग्राहक की समस्या का समाधान हो सकेगा, इसको लेकर कोई गारंटी या आश्वासन नहीं मिलता है।
निजी बैंकों के एटीएम सबसे ज्यादा परेशानी का सबब बने

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सरकारी बैंकों के एटीएम तो राशि उगलने में परेशानी बनते ही हैं, सबसे अधिक समस्या निजी बैंकों के एटीएम की है। मसलन देना बैंक के एटीएम पर अधिकांश समय राशि नहीं मिलती या फिर यह एटीएम बंद नजर आता है। जिसकी शिकायत ग्राहकों द्वारा समय-समय पर प्रबंधक से की जाती रही है। इसके अलावा अन्य निजी बैंकों में भी लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसके लिए ग्राहक बार-बार बैंक प्रबंधन का चक्कर काटते हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं होती है। आलम यह है कि एटीएम में राशि न मिलने की वजह से ग्राहकों को एक एटीएम से दूसरे एटीएम के चक्कर लगाना पड़ते हैं।
 

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