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कोरोना ने कमर तोड़ दी प्राइवेट शिक्षण संस्थानों की

संजीवनी टुडे 18-05-2020 04:10:00

कोरोना ने कमर तोड़ दी प्राइवेट शिक्षण संस्थानों की


हमीरपुर। कोरोना महामारी ने प्राइवेट विद्यालयों की दशा खराब कर दी है। इन विद्यालयों की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई है कि उनमें कार्यरत शिक्षकों का वेतन मिल पाना तब तक संभव नहीं है जब तक शुल्क आनी शुरू नहीं हो जाती। वजह है कि अचानक विद्यालय बंद हो जाने से बच्चो का मार्च माह तक का काफी शुल्क शेष पड़ा है।

प्राइवेट विद्यालय चलाने वाले लोग बताते हैं कि 31 मार्च को सत्र समाप्त होने वाला था। परीक्षाए होने जा रही थी। हर सत्र की तरह सत्र समाप्त होते होते 80 प्रतिशत शुल्क वसूल हो जाती थी। किंतु कोरोना की धमाकेदार दस्तक ने मार्च के दूसरे सप्ताह से ही विद्यालयों को प्रभावित कर दिया था। 25 मार्च से लाक डाउन शुरु हो गया तो परीक्षाए नहीं हुई तो शुल्क भी नहीं आया अब धीरे धीरे दो माह होने वाले हैं विद्यालय बंद है। कब तक खुलेंगे कोई भरोसा नहीं है। तो विद्यालयों का बकाया शुल्क भी आना संभव नहीं है। नया सत्र अप्रैल माह से शुरू होता है लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते लाक डाउन चल रहा है। सत्र  प्रारंभ ही नहीं हो सका है और आगे कब शुरू होगा। तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

कुछ लोगों का कहना है कि सत्र जुलाई से शुरू होगा कुछ लोगों का यह भी मानना है कि सत्र सितंबर माह से शुरू हो सकता है। कुछ भी हो जहां एक ओर नौनिहालों की पढ़ाई बाधित है। वहीं प्राइवेट शिक्षण संस्थान चलाने वाले लोग भी परेशान हैं। इसके साथ साथ प्राइवेट संस्थानों में मामूली वेतन पर कार्य करने वाले शिक्षक लोग भी परेशान हैं। क्योंकि उनका वेतन तभी मिल पाएगा जब शुल्क की वसूली होगी। शुल्क आने में जितनी देर होगी वेतन उतना ही लेट होता चला जाएगा। 

इस तरह से प्राइवेट शिक्षकों को तीन माह से वेतन न मिलने से वे काफी परेशान है लॉक डाउन के दौरान जब उन्हें वेतन नहीं मिल पा रहा है तो उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है। इस तरह से कोरोना संक्रमण ने प्राइवेट शिक्षकों को तथा प्राइवेट संस्थानों को धराशायी करके रख दिया है। आगे कब विद्यालय खुलते हैं तथा बिगड़ी हुई स्थिति में कब सुधार हो पाता है। वक्त पर पता चलेगा। फिलहाल प्राइवेट विद्यालय के संचालक इस विषम परिस्थिति में बेहद परेशान हैं।

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