संजीवनी टुडे

वामपंथियों की अनदेखी की वजह से बंगाल में एकला चलो की राह पर कांग्रेस

संजीवनी टुडे 17-03-2019 17:41:53


कोलकाता। लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के साथ कांग्रेस के संभावित गठबंधन को झटका लगता दिख रहा है। माकपा की ओर से राज्य की 25 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा किए जाने के बाद से अब यह स्पष्ट हो चला है कि माकपा कांग्रेस से गठबंधन को बहुत अधिक महत्व नहीं दे रही है। अब प्रदेश कांग्रेस ने भी अकेले चुनाव लड़ने की राह पकड़ ली है। 

शुक्रवार को वाममोर्चा के चेयरमैन विमान बोस की ओर से उम्मीदवारों की घोषणा कर दिए जाने के बाद शनिवार को प्रदेश कांग्रेस इकाई की बैठक हुई, जिसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्रा, सांसद प्रदीप भट्टाचार्य, दीपा दास मुंशी, अधीर रंजन चौधरी जैसे बड़े नेता शामिल हुए। शनिवार देर रात तक चली इस बैठक में माकपा से संभावित गठबंधन पर कुछ भी राय नहीं बन पाई और रविवार को अब प्रदेश कांग्रेस ने यह निर्णय किया है कि वह पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ना चाहती है। 

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प्रदेश कांग्रेस की एक वरिष्ठ महिला नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर रविवार को कहा कि माकपा ने शुरुआत से ही गठबंधन को लेकर दगाबाजी की है। हम लोग मुर्शिदाबाद और रायगंज सीट पर उम्मीदवार उतारना चाहते थे लेकिन माकपा ने पहले ही वहां उम्मीदवार की घोषणा कर दी थी। उसके बाद पुरुलिया और बसीरहाट सीट पर हमारी उम्मीदें थीं लेकिन हम से बिना राय लिये इन सीटों पर भी उम्मीदवार उतार दिया गया है। यहां तक की बाकी बची 17 सीटों को कांग्रेस के लिए छोड़ने की बजाय विमान बोस ने स्पष्ट किया है कि बाकी सीटों पर भी वाममोर्चा उम्मीदवार उतारेगा। 
इसका मतलब स्पष्ट है कि माकपा नहीं चाहती कि कांग्रेस से गठबंधन हो। ऐसे में कांग्रेस अपने स्वाभिमान को ताक पर रखकर गठबंधन की बाट नहीं जोहेगी। महिला नेता ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को इस बारे में एक चिट्ठी भेजी गई है, जिसमें कहा गया है कि कांग्रेस राज्य की सभी 42 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी और अकेले चुनाव लड़ेगी। इससे पार्टी को सांगठनिक मजबूती मिलने वाली है।

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उल्लेखनीय है कि करीब दो महीने पहले से ही भाजपा और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चर्चा चल रही है लेकिन माकपा लगातार कांग्रेस को दरकिनार कर उम्मीदवारों की घोषणा करती जा रही है। इससे प्रदेश कांग्रेस के मंसूबों पर पानी फिरता जा रहा है। अब राज्य में अकेले चुनाव लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। जब रायगंज और मुर्शिदाबाद सीट पर सबसे पहले माकपा ने उम्मीदवारों की घोषणा की थी तब राहुल गांधी ने स्वयं हस्तक्षेप किया था और सीताराम येचुरी से बात की थी। तब इस बात पर सहमति बनी थी कि बाकी बची सीटों पर कांग्रेस के साथ गठबंधन होगा लेकिन प्रदेश कांग्रेस पुरुलिया और बसीरहाट सीट पर उम्मीदवार उतारने पर तुली हुई थी जिस पर वाममोर्चा के घटक दल हमेशा से उम्मीदवार उतारते रहे हैं। इन दलों ने यह सीट छोड़ने से इनकार कर दिया, जिसके बाद माकपा ने घटक दलों को प्राथमिकता देते हुए उन सभी सीटों पर उम्मीदवार घोषित किया, जिस पर कांग्रेस उम्मीदवार देना चाहती थी। इसके बाद अब गठबंधन की राहें लगभग बंद हो चुकी हैं। 
 

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