संजीवनी टुडे

नशा तस्करी का मुद्दा उठाने वाले कांग्रेस विधायक जीरा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित

संजीवनी टुडे 16-01-2019 16:33:50


चंडीगढ़| पंजाब कांग्रेस ने अपने एक विधायक कुलबीर सिंह जीरा को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है। जीरा पर आरोप थे कि उन्होंने एक सार्वजनिक मंच पर अपनी ही सरकार की तीव्र आलोचना की थी| इस वजह से सरकार को शर्मिंदगी उठानी पड़ी। कांग्रेस पार्टी ने इसके लिए विधायक जीरा को कारण बताओ नोटिस जारी करके 3 दिन में अपना जवाब देने को कहा था। पंजाब कांग्रेस के प्रधान सुनील जाखड़ ने बताया कि विधायक जीरा के आए जवाब से पार्टी संतुष्ट नहीं हुई| इसलिए उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किया गया है|

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चंद रोज पहले जिला फिरोजपुर के विधानसभा क्षेत्र जीरा के विधायक कुलबीर सिंह जीरा ने सरपंचों-पंचों के शपथ ग्रहण समारोह का यह कहते हुए बहिष्कार कर दिया था कि राज्य में पुलिस प्रशासन नशे के सौदागरों को खुलेआम शह दे रहा है| तस्कर पुलिस अधिकारियों की गाड़ियों में बेखौफ घूम रहे हैं। चार सप्ताह में नशा खत्म करने की धार्मिक शपथ लेने वाले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के लिए यह सरकार के अंदर से ही सीधी -सीधी चुनौती थी, जिसे लेकर विपक्ष ने कैप्टन सरकार की जमकर आलोचना की। सरकार को राज्यभर में शर्मसार होना पड़ा और मंत्री भी इस बारे में लोगों से कन्नी काटते नजर आए। हालांकि विधायक जीरा के इन आरोपों पर पंजाब पुलिस के डीजीपी ने जांच शुरू कर दी है| 

उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट एक सप्ताह में मुख्यमंत्री को देने की बात कही है। जांच में यह बात देखी जाएगी कि विधायक जीरा द्वारा लगाए गए नशा तस्करी और नशे को शह देने के गंभीर आरोपों में अधिकारी किस हद तक शामिल हैं। इधर पार्टी की तरफ से विधायक कुलबीर सिंह जीरा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और उन्हें अपने आरोपों का जवाब देने के लिए 3 दिन का समय दिया गया। बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने बताया कि विधायक जीरा द्वारा लगाए गए आरोप अधूरे प्रमाण वाले थे| इसलिए विधायक जीरा को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है। 

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उन्होंने कहा कि चूंकि कुछ अन्य लोगों ने भी सार्वजनिक तौर पर सरकार की आलोचना की थी और अनुशासन भंग किया था| उसी का परिणाम था कि विधायक जीरा ने खुलेआम सरकार पर ही आरोप जड़ दिए। जाखड़ ने स्पष्ट किया कि विधायक को अपनी बातें सार्वजनिक तौर पर कहने का अधिकार तो है परंतु पार्टी से जुड़े गंभीर मामलों को सार्वजनिक तौर की बजाय मुख्यमंत्री अथवा पार्टी के राज्य अध्यक्ष के समक्ष रखा जाना चाहिए था, परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया।

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