संजीवनी टुडे

जीवन में विपरिताएं आना पार्ट ऑफ लाइफ: चंद्रप्रभ

संजीवनी टुडे 15-05-2019 21:16:21


जोधपुर।  संत चन्द्रप्रभ महाराज ने कहा कि जीवन में विपरितताओं का आना पार्ट ऑफ लाइफ है, पर उन विपरितताओं का धैर्य और शांति से सामना करना आर्ट ऑफ लाइफ है। यदि आप हर हाल में शांति और धैर्य से पेश आते है तो इससे बड़ी सफलता और कोई नहीं। 

स्वयं का शांतिमय होना घर, समाज और अध्यात्म की सबसे बड़ी सेवा है। जो स्वयं शांतिमय होते है, वही दूसरों को शांति का सुकून दे सकते है। जो अपने अन्तर्मन को शांतिमय और आनंदमय बनाते है, वे कमल के फूल की तरह खिल उठते है। एेसे लोग जहां भी रहते है, उनसे शांति और आनंद का स्वर्ग ही स्थापित होता है। यदि आप शांति-पथ का आनंद लेना चाहते है, तो कृपया हर रोज सुबह-शाम 20 मिनट तक शांत मंद श्वास लेते हुए उनका ध्यान कीजिए। 

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यह धारणा रखिए कि मैं श्वास को शांत करते हुए अपने अन्तर्मन और उसकी उत्तेजनाओं को शांतिमय बना रहा हूं। शुरू में भले ही उचाट लगे, पर ज्यों-ज्यों शांति का बोध और लक्ष्य प्रगाढ़ होता जाएगा, आप अपने अस्तित्व से रूबरू होते जाएंगे।

संतप्रवर द आर्ट ऑफ डिवाइन लाइफ से जुड़े जीवन निर्माण ध्यान योग शिविर के समापन पर कायलाना रोड स्थित संबोधि धाम में आयोजित मंगल मैत्री महोत्सव में साधक भाई-बहनों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हर श्वास अद्भुत है और हर सुबह नई जिंदगी की शुरुआत है। आप अपनी हर श्वास और हर कर्म का आनंद लीजिए। आपके जीवन में शांति का सौन्दर्य बढ़ता जाएगा। आप शांतिपूर्वक बैठिए और सावचेत होकर श्वसन-क्रिया कीजिए। दिमाग में शांति और मुस्कान के भाव को सघन करते जाइए। याद रखिए दिमाग में विषाद का चौनल चलाएंगे तो हम विषादग्रस्त होंगे और शांति का चौनल चलाएंगे तो हम अपनी जीवंतता को उपलब्ध होंगे।

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उन्होंने कहा कि आप शांतिदूत बनकर मुस्कुराइए, परिवार की खुशी के लिए मुस्कुराइए, समाज के सुखद वातावरण के लिए मुस्कुराइए, भावी पीढ़ी की सुन्दरता केे लिए मुस्कुराइए। शांत और मुस्कुराता इंसान विश्व शांति का सच्चा पुजारी है। आप आध्यात्मिक रूप से जाग्रत होइए और सबसे प्रेम करने की दिव्य प्रकृति के मालिक बनिए। यदि आप एेसा करते है तो आप इंसान नहीं, देवदूत है। आप तो फूलों की तरह महकते रहें, सितारों की तरह चमकते रहें। किस्मत से मिली है जिन्दगी, आप खुद भी सदा खुश रहिए और औरों को भी खुशियां बांटते रहिए। इस अवसर पर साधकों को मंगल मैत्री ध्यान का प्रयोग करवाया। सभी साधकों ने एक-दूसरे को गले लगाकर खुशियों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने अपनी ओर से हाथ खड़े कर धरती पर प्रेम और शांति का विस्तार करने का सेवा संकल्प लिया।

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