संजीवनी टुडे

बोकारो के पेटरवार में कोयला माफिया सक्रिय, बाइक व साइकिल से होती तस्करी

संजीवनी टुडे 18-01-2019 22:17:04


बोकारो। पेटरवार थाना क्षेत्र के खेतको- दांतू के रास्ते इन दिनों साइकिल एवं मोटरसाइकिल के माध्यम से कोयले की तस्करी व्यापक पैमाने पर हो रही है। पुलिस के आला अधिकारी जहां जिले में किसी भी सूरत में कोयले की तस्करी न होने के दावे करते हैं, वहीं दूसरी तरफ कोयला माफिया उनके दावों को ठेंगा दिखाते हुए बेधड़क धड़ल्ले से अपने गोरखधंधे को अंजाम देने में लगे हैं। इसके कारण एक और जहां कोयला प्रतिदिन चांदी काट रहे है, वहीं दूसरी और सीसीएल को प्रतिदिन लाखों रुपये राजस्व की क्षति हो रही है। कोयला-तस्करी को रोकने की दिशा में पुलिस प्रशासन और सीसीएल प्रबंधन पंगु साबित हो रहा है।

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इन जगहों पर रेलवे ट्रैक से होती है चोरी सीसीएल के जारंगडीह और असनापानी रेलवे साइडिंग में जब कोयले से भरी रैक लगती है तो कोयला माफियाओं के लोग रेलवे रैक से कोयला उतार लेते हैं और उसे खेतको स्थित दामोदर पुल के अगल-बगल कोयले को जमा करते है। फिर वहां से साइकिलों और मोटरसाइकिलों के माध्यम से कोयले की तस्करी कोल माफियाओ के द्वारा करायी जाती है।

दिन के उजाले में हो रहा गोरखधंधा पेटरवार थाना क्षेत्र के खेतको ग्राम स्थित दामोदर पुल के पास से रेलवे ट्रैक से उतारे गये कोयले की तस्करी साइकिल और मोटरसाइकिलों के द्वारा दिन के उजाले में की जा रही है। इसे देखने वाला कोई नहीं या जान बूझकर कोई देखना नहीं चाहता। खेतको दांतू के रास्ते हर रोज सैकड़ों साइकिल और बाइक अवैध कोयले से फुल होकर आते-जाते हैं। इसे कभी भी देखा जा सका है। चार बजे भोर से लेकर देर शाम तक कोयला ढोने का दौर चलता रहता है। इस काम में एक हजार से ज्यादा साइकिल और मोटरसाइकिलें लगी रहती हैं। 

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झारखण्ड से बंगाल पहुंचता है अवैध कोयला रेलवे रैंक से चोरी किया गया कोयला साइकिल और मोटरसाइकिलों के माध्यम से खेतको, रोहर, चांदो, दांतू ,कसमार, खैराचातर और जरीडीह थाना क्षेत्र के अराजू के रास्ते बंगाल के पुंदाग होते हुए गढ़ जयपुर पहुंचाया जाता है, जहां से ट्रको में लोड कर अन्य राज्यों में उसे भेज दिया जाता है। सीसीएल के जारंगडीह और असनापानी रेलवे ट्रैक पर लगने वाले कोयले से भरे रैक से कोयला उतारकर अवैध कोयला डिपो और बंगला ईंट भठा में साइकिलों और मोटरसाइकिलों के माध्यम से पहुंचाया जाता है। इस तरह कोयले तस्करी का तार झारखण्ड से अन्य प्रदेशों तक जुड़ा हुआ है, जिसके कारण कोल माफिया बेखौफ होकर कोयले की तस्करी कर सरकारी सम्पति की लूट कर रहे है। कोल माफियाओं का यह धंधा एक लंबे समय से फल-फूल रहा है। जाहिर है इतने बड़े गोरखधंधे में पुलिस की भी संलिप्तता हो सकती है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच की जरूरत है।

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