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मुख्यमंत्री का विधायकों को पत्र भ्रमित करने का प्रयास- राजेन्द्र राठौड़

संजीवनी टुडे 09-08-2020 22:51:53

राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पत्र में मियां मिठ्ठू बनकर कोरोना के शानदार प्रबन्धन के लिए अपनी सरकार की प्रशंसा की है।


जयपुर। विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा के सभी विधायकों को 8 अगस्त को लिखे पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अपनी डगमगाई सरकार को बचाने के लिए मुख्यमंत्री जी का यह प्रयास विधायकों को भ्रमित करने मात्र का है। 

राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पत्र में मियां मिठ्ठू बनकर कोरोना के शानदार प्रबन्धन के लिए अपनी सरकार की प्रशंसा की है। जबकि आज प्रदेश में कोरोना का सामुदायिक प्रसार प्रारम्भ हो गया है। विगत 30 दिन में 29 हजार 265 नये संक्रमित लोगों के साथ आकड़ा 51 हजार को पार कर गया है तथा प्रतिदिन प्रदेश में कोरोना के कारण मृत्यु का आंकड़ा दो अंकों में पहुंच चुका है तथा कुल मृत्यु का आंकड़ा 778 को छू रहा है। 

दुर्भाग्य से संक्रमित लोगों में 10 हजार से ज्यादा ऐसे रोगी भी है जिनके संक्रमण के सोर्स की पहचान विभाग करने में पूर्ण विफल रहा है। हालात यह है कि चिकित्सा विभाग का निदेशालय भी संक्रमण से अछूता नहीं रहा जहां 35 से ज्यादा अधिकारी/ कर्मचारी संक्रमित हो गये।

संवेदनशील, पारदर्शी एवं जवाबदेही शासन देने का उल्लेख मुख्यमंत्री जी ने अपने पत्र में किया है। आज स्थिति यह है कि राज्य में कानून व्यवस्था बिल्कुल चरमराई हुई है। हत्या, बलात्कार व बलात्कार के बाद न्याय नहीं मिलने के कारण पीड़िताओं द्वारा आत्महत्या करने का सिलसिला लगातार जारी है।

राठौड़ ने कहा कि राज्य सरकार की वर्ष 2020 के इसी मई माह में जारी 5 माह की क्राइम ब्यूरो रिपोर्ट यह कहती है कि प्रदेश में इन 5 माह में 594 हत्याओं में से 443 हत्याओं व बलात्कार के 1807 प्रकरणों में से 1020 मामलों में अपराधी पुलिस की गिरफ्त से दूर है, जो जर्जर कानून व्यवस्था का ताजा प्रमाण है। 

राठौड़ ने कहा कि राज्य में मात्र एक माह में बेरोजगारी का आकड़ा 13.7 से बढ़कर 15.2 हो जाना यह सिद्ध करता है कि राज्य सरकार की नीतियां बेरोजगारों को रोजगार देने में पूर्णतः विफल रही है। 

राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री का बसपा के 6 विधायकों के कांग्रेस पार्टी में विलय को विधि सम्मत उस वक्त बताना जब दो दिन पश्चात ही उक्त प्रकरण माननीय उच्च व उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। न्यायालय के निर्णय को प्रभावित करने की कुचेष्ठा है। 

राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री जी अगर संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा 4 (1) को पढ लेते जिसमें स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी राजनैतिक दल का विलय तभी दूसरे राजनैतिक दल में हो सकता है जब मूल राजनीतिक दल पूर्णरूप से दूसरे राजनीतिक दल में विलय हो तथा पैरा 4 (2) के अनुसार उस विलय के लिए अपनी सहमति दें। यह सर्वविदित है कि बहुजन समाजवादी आज भी चुनाव आयोग द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त पार्टी है। मुख्यमंत्री जी का यह वक्तव्य विधायकों को भ्रमित करने का एक असंवैधानिक कृत्य मात्र है।

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