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महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज, राष्ट्रपति शासन की मांग के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुलाई महाअघाड़ी नेताओं की बैठक

संजीवनी टुडे 27-05-2020 12:11:08

ताबड़तोड़ बैठकें और सियासी दिग्गजों की हालिया मुलाकात से हर किसी के जेहन में यही सवाल उठ रहा है कि क्या एक बार फिर से उद्धव ठाकरे की सीएम की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है


मुंबई। कोरोना महामारी से जूझ रहे महाराष्ट्र में सियासी हलचल फिर तेज हो गई है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपने आधिकारिक निवास महाअघाड़ी सहयोगियों की बैठक बुलाई है। इस मीटिंग पर हर किसी की नजर जा टिकी है। 

Uddhav Thackeray

सीएम की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है?
ताबड़तोड़ बैठकें और सियासी दिग्गजों की हालिया मुलाकात से हर किसी के जेहन में यही सवाल उठ रहा है कि क्या एक बार फिर से उद्धव ठाकरे की सीएम की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है? क्या एक बार फिर एनसीपी चीफ शरद पवार चौंकाएंगे? क्या राहुल गांधी की चुप्पी उद्धव ठाकरे पर भारी पड़ेगी? 

भाजपा नेता कर चुके है राष्ट्रपति शासन मांग- 
बैठक इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि पिछले दो दिनों से दो बड़े भाजपा नेता प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर चुके हैं। इस बैठक में गठबंधन तीनों पार्टियों शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बड़े नेता शामिल हो सकते हैं।

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राज्य सरकार को लग रहा है कि केंद्र सरकार कोरोना की स्थिति को देखते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर सकती है और इसी पर चर्चा करने शिवसेना, एनसीपी के नेता राज्यपाल से मिल रहे हैं. तो सवाल ये है कि इन बैठकों से कांग्रेस ग़ायब क्यों है।  अब राज्य में राष्ट्रप्रति शासन लगेगा या नए फ़ॉर्मूले वाली सरकार बनेगी ये आनेवाले दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।

शुरू हुआ राजनीतिक विवाद
इस राजनीतिक उथल-पुथल की खबरों को रफ्तार तब मिली जब 25 मई की सुबह शरद पवार ने महाराष्ट्र के राज्यपाल बीएस कोश्यारी से मुलाकात की। पवार और कोश्यारी के बीच इस बैठक का समय अहम माना जा रहा था क्योंकि यह शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन (महा विकास अघाड़ी) सरकार का नेतृत्व कर रही शिवसेना और राज भवन के बीच पिछले दिनों गतिरोध की खबरें सामने आईं।

लगातार राज्यपाल से मुलाकात कर रहे हैं शिवसेना-NCP नेता
पिछले तीन दिनों में शिवसेना, एनसीपी नेताओं की राज्यपाल से हो रही मुलाक़ातें और दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच हो रही गुप्त बैठकों ने गठबंधन की सरकार पर कांग्रेस के महत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के बयान से भी साफ हो गया है कि कांग्रेस की गठबंधन की इस सरकार में बन रहने की ज़्यादा दिलचस्पी नहीं है।ऐसे में क्या कांग्रेस को अलग रखकर शिवसेना-एनसीपी, बीजेपी के साथ सरकार बनाने के तरफ़ बढ़ रहे हैं?

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ठाकरे सरकार पर कोई खतरा नहीं: शरद पवार
उधर मंगलवार को राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने स्पष्ट कहा कि ठाकरे सरकार स्थिर है। राज्य सरकार पर कोई खतरा नहीं है। ठाकरे सरकार को समर्थन देने वाली कांग्रेस और राकांपा मजबूती से सरकार के साथ हैं। शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस तीनों दल एकजुट हैं। 

पवार ने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य कोरोना संकट से बाहर निकलने का है। इसके लिए पूरी ताकत लगानी है। राज्यपाल ने मुझे चाय पीने बुलाया था। पवार राज्यपाल से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ठाकरे से मिलने उनके मातोश्री बंगले में गए थे। सरकार बनने के बाद पवार पहली बार मातोश्री गए थे।

'सरकार अपने बोझ से ही गिर जाएगी'
पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि, 'राज्य सरकार अभी भी केंद्र की ओर से उपलब्ध कराई गई आर्थिक मदद भी खर्च नहीं कर पाई है। मैं यह समझ ही नहीं पा रहा हूं कि राज्य सरकार की प्राथमिकता क्या है, आज राज्य को सकारात्मक नेतृत्व चाहिए। मैं आशा करता हूं कि उद्धव ठाकरे उचित फैसले लेंगे। कोविड-19 की गंभीर स्थिति को देखते हुए हमारी राज्य की सरकार को बदलने में रुचि नहीं है। हम कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ रहे हैं और इसके लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाना चाहते हैं। हम सरकार को गिराने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, यह सरकार अपने बोझ से ही गिर जाएगी।' 

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एनसीपी दे चुकी है मुलाकात पर सफाई
शरद पवार के राज्यपाल से मुलाकात पर एनसीपी ने स्पष्ट किया है कि यह कोई राजनीतिक मुलाकात नहीं थी और न ही किन्हीं मुद्दों पर चर्चा हुई। एनसीपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि यह मात्र शिष्टाचार भेंट थी। राज्यपाल के आमंत्रण पर यह मुलाकात हुई और बातचीत में कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं रहा।

सरकार मजबूत: थोराट
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और राजस्व मंत्री बालासाहब थोराट ने कहा कि राज्य सरकार की स्थिरता को लेकर किसी प्रकार की शंका करने की जरूरत नहीं है। सरकार मजबूत है और पर्याप्त  संख्याबल है। अच्छा काम हो रहा है। राज्य में राष्ट्रपति शासन को लेकर दिल्ली और मुंबई में कोई चर्चा नहीं है। 

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महाराष्ट्र में कांग्रेस सबसे छोटा दल, फैसला नहीं कर सकते: राहुल
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े एक सवाल पर मंगलवार को कहा था, ‘‘सरकार का समर्थन करना और सरकार को चलाना दो अलग अलग बातें हैं। भाजपा महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करना चाहती है तो उसमें दिक्कत नहीं है, लेकिन राष्ट्रपति शासन लगाना चाहती है तो उसमें दिक्कत है। पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पुड्डुचेरी में कांग्रेस की सरकार है, जहां हम अपने हिसाब से फैसला कर सकते हैं, लेकिन महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार है जहां कांग्रेस सबसे छोटा दल है। शिवसेना और राकांपा दो बड़े दल हैं। जैसे हम कांग्रेस शासित राज्यों में फैसला ले सकते है, वैसे हम महाराष्ट्र में नहीं कर सकते।’’

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