संजीवनी टुडे

मुख्यमंत्री गहलोत ने स्वीकारी हार, कहा लोकतंत्र में जनादेश शिरोधार्य

संजीवनी टुडे 23-05-2019 21:54:17


जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की हार स्वीकार करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनादेश शिरोधार्य होता है, जिसे हम विनम्रता के साथ स्वीकार करते हैं। कांग्रेस ने इस परम्परा को सदैव बनाये रखा और इसका निर्वहन करते हुए देश में लोकतंत्र को मजबूत और कायम रखने का काम किया।

मुख्यमंत्री ने गुरुवार को बयान जारर करते हुए शांतिपूर्वक मतदान के लिए जनता एवं कांग्रेसजनों को धन्यवाद दिया और कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के नेतृत्व में एकजुट होकर कांग्रेस की नीतियों, कार्यक्रमों एवं सिद्धान्तों और जन घोषणा-पत्र के कार्यक्रमों के आधार पर जन-जन तक पहुंचने के लिए कठोर परिश्रम किया। उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है, हमें देश की एकता व अखण्डता को बनाये रखने के लिए निरन्तर कार्यरत रहना है।

गहलोत ने कहा कि कांग्रेस के लिये देश सर्वोपरि है, जबकि भाजपा के लिये सत्ता महत्वपूर्ण है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह आम चुनाव जनहित एवं विकास के मुद्दों पर लड़ा जबकि नरेन्द्र मोदी ने चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ाते हुए धर्म, जाति, सेना के शौर्य और पराक्रम के नाम पर यह चुनाव लड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2014 में किये चुनावी वादों के बारे में जनता को कोई जवाब नहीं दिया और ना ही भाजपा के संकल्प-पत्र में किये गये वायदों की चर्चा की। कांग्रेस ने अपने जन घोषणा-पत्र में लोक कल्याण और विकास के लिये बनाये गये कार्यक्रमों पर वोट मांगे।

बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए गहलोत ने अमेठी में राहुल गांधी की हार पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा कई बार समय आता है कि लोग भी भावनाओं में बह जाते हैं और आज मैं देखता हूं, लोगों ने भाजपा के पक्ष में वोट दिए हैं। मैंने इंदिरा गांधी का जमाना देखा है वह स्वयं चुनाव हार गई थी, कांग्रेस की कमोबेश वही स्थिति उस वक्त में बनी थी, जो आज स्थिति बनी है। उसके बाद में वापस कांग्रेस के पक्ष में माहौल बना, जनता का मैंडेट मिला और कांग्रेस ने 25 साल तक राज किया। उन्होंने कहा कि यह हार और जीत तो लोकतंत्र में चलती रहती है।

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हम तो चाहेंगे कि भविष्य के अंदर भी इन्होंने अभियान को जिस रूप में किया है, किस प्रकार से पक्ष और विपक्ष मिलकर के क्या सोच रखें, अपने देश के लिए वह बताएं। उनके लिए सबका साथ सबका विकास के मायने अलग है परिभाषा दूसरी है, हमारी परिभाषा दूसरी है। सबका साथ सबका विकास का मतलब है सब वर्गों का, सभी धर्म के लोगों का, सभी जातियों का, पिछड़ों का, अगड़ों का, दलितों का सबका साथ विकास हो। इस मैंडेट से लोगों की जो आशाएं, अपेक्षाएं बनी है कितना खरा उतरते हैं मोदी जी और उनकी गवर्नमेंट टाइम बताएगा।

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