संजीवनी टुडे

संस्कृत विवि पहुँचते ही भावुक हुए मुख्य न्यायाधीश

संजीवनी टुडे 22-05-2019 18:58:44


दरभंगा। सच ही कहा गया है कि संजोयी यादें वह भी अपने पुरखों से जुड़ी हुई काफी संवेदनशील व दिल को छू जाने वाली होती हैं।इसका सीधा व स्पष्ट उदाहरण  बुधवार की सुबह कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय कैम्पस में पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए पी शाही के पहुंचते ही सभी ने खुली आँखों देखा व महसूस किया।कैम्पस में प्रवेश करते ही न्यायमूर्ति काफी भावुक हो गए। 

व्यग्रता इतनी कि अपने व्यस्ततम कार्यक्रम से समय निकालकर उन्होंने विश्वविद्यालय के मुख्य भवन , दरबार हाल, पुस्कालय और संग्रहालय में हर चीज को बारीकी  से देखा व जाना। इसी क्रम में राज दरभंगा के महाराजा के साथ अपने परदादा की तस्वीर देख वे अतीत में खो गए और उसे कुछ देर निहारने के बाद दनादन कई तस्वीरें अपने कैमरे में कैद कर ली। उन्होंने भ्रमण के सभी ऐतिहासिक पलों को कैमरे में समेटा और जी भर अपने पुरखों व राज दरभंगा परिवार के साथ उनके मधुर व गहरे सम्बन्धों को सिरे से एक नहीं बल्कि कई बार सहलाया। संग्रहालय में रखी सभी पौराणिक वस्तुओं को उन्होंने बारी -बारी से देखा। बीच- बीच में उन्होंने कुछ जिज्ञासा भी जताई।

  धरोहरों को संरक्षित रखने में लगे मिथिला विश्वविद्यालय के सहायक सदस्य पीआरओ संतोष कुमार ने उन्हें पौराणिक जानकारी देकर संतुष्ट किया। इसके अलावा भी सन्तोष ने न्यायमूर्ति श्री शाही को राज दरभंगा व पूर्णिया स्टेट से जुड़े घटनाक्रमों और पूर्वजों के बीच बहुत ही दोस्ताना सम्बन्ध की जानकारी दी।शायद उसी पुराने सम्बन्धों को पुचकारने के लिए वे कैम्पस आये बिना आज नही रह पाए। पुरखों के प्रति उनके समर्पण व लगाव को देखकर सभी न्यायमूर्ति की प्रसंशा कर रहे थे। केंद्रीय पुस्कालय में रखी पौराणिक व दुर्लभ पुस्तकों को देखकर न्यायमूर्ति ने डिजिटलाइजेशन के जरिये इसे सुरक्षित व संरक्षित करने की सलाह कुलपति प्रो सर्व नारायण झा को दी।

 बता दें कि न्यायमूर्ति का किताबों से गहरा लगाव रहा है और अपने व्यस्ततम समय से मौका निकाल कर वे आज भी घण्टों विधि समेत अन्य विधाओं की किताबें पढ़ते हैं। इसके पूर्व न्यायमूर्ति श्री शाही ने कुलपति प्रो झा से संस्कृत विश्वविद्यालय में चल रही शैक्षणिक गतिविधियों के बारे में विस्तार से जाना। देव भाषा में खुद गहरी रुचि रखने वाले न्यायमूर्ति ने संस्कृत व संस्कृति के विकास व संवर्धन के साथ -साथ इसके संरक्षण की पुरजोर वकालत की। इसके अलावा उन्होंने कुलपति को संस्कृत शिक्षा के उत्थान के लिए कई अन्य सलाह दी ।

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कुलपति ने भी उसे अति गम्भीरता से लेते हुए यथाशीघ्र सरजमीं पर उतारने का उन्हें भरोसा दिलाया।  न्यायमूर्ति के कैम्पस में प्रवेश करते ही वैदिक मंगलाचरण व वैदिक रीति से उनका भव्य स्वागत किया गया । कुलपति ने उन्हें मिथिला की परम्परा के अनुरूप पाग व चादर से सम्मानित किया। मौके पर कुलपति प्रो झा के अलावा, प्रो श्रीपति त्रिपाठी, प्रो विद्येश्वर झा, डा अवधेश कुमार चौधरी, डॉ सत्यवान कुमार , कुलसचिव नवीन कुमार  मौजूद थे। 

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