संजीवनी टुडे

छत्तीसगढ़: जीत के बाद मोदी मंत्रीमंडल में शामिल होने की होड़

संजीवनी टुडे 25-05-2019 19:44:12


रायपुर। लोकसभा चुनाव के बाद अब छत्तीसगढ़ में इस बात के कयास जोरों पर हैं कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद गठित होने वाले नये मंत्रिमंडल में छत्तीसगढ़ से कौन सा चेहरा होगा। मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए नवनिर्वाचित सांसदों समेत राज्य सभा सांसदों के बीच होड़ मच गई है। उनके समर्थक भी जोर शोर से अपने नेता को टीम मोदी में जगह देने की मांगे शुरू कर दी हैं। 2014 में केवल विष्णुदेव साय को ही केन्द्रीय राज्यमंत्री का दर्जा मिल पाया था।

मोदी मंत्रिमंडल में छत्तीसगढ़ का कौन सा चेहरा होगा शामिल?

सांसद विजय बघेल
छत्तीसगढ़ में 11 लोकसभा सीटों पर भाजपा ने 9 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है। कुछ सीटों पर भाजपा सांसदों ने लाखों के अंतर से जीत दर्ज की है। इनमें राज्य के सबसे हाई प्रोफाइल कहे जाने वाले दुर्ग से सासंद बने विजय बघेल सबसे पहले नंबर पर हैं। विजय बघेल ने कांग्रेस उम्मीदवार को लगभग 3 लाख 91 हजार वोटों से हराया है, जो कि छत्तीसगढ़ में इस बार रिकार्ड बन चुकाहै। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश उनके चाचा हैं और विजय बघेल अपने चाचा भूपेश को भी चुनाव में पराजित कर चुके हैं। उनकी इसी कद की वहज से उन्हें टिकट दिया गया था। अब विजय बघेल के समर्थक उन्हें मोदी मंत्रिमंडल में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे हालात में छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़िया सरकार को टक्कर देने के लिए विजय बघेल को मंत्री पद दिया जा सकता है, जिससे छत्तीसगढ़ की जनता को पार्टी का बेहतर संदेश मिल सके।

सरोज पांडेय
लेकिन दुर्ग से एक और तेज तर्रार पार्टी नेता सरोज पांडे भी हैं, जो कैबिनेट में जगह पाने की कवायद में लगी हैं। साफ सुथरी छवि की कही जाने वाली छत्तीसगढ़ कोटे से राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय के नाम भी राजनीति के क्षेत्र में कई रिकार्ड कायम हैं। लेकिन दुर्ग से नवनिर्वाचित सांसद विजय बघेल के विरोधी गुट की नेता सरोज पांडे पर बघेल के खिलाफ काम करने का आरोप लगा है। यहां तक कि दुर्ग जिला की महिला पार्टी अध्यक्ष ऊषा तावड़े पर भी ऐसे आरोप लगे हैं। दुर्ग में भाजपा महिला नेताओं का एक अलग ताकतवर गुट है जो पार्टी के दूसरे नेताओं के विरोध में रहते हैं। हालांकि, हिन्दुस्थान समाचार ने जब ऊषा तावड़े से इस बारे में पूछा तो उन्होंने ऐसी किसी बात से इंकार कर दिया। 

उन्होंने कहा कि हमने पार्टी स्तर पर विजय बघेल को पूरा समर्थन दिया है। सरोज पांडे पर लगा यह दाग उन्हें मोदी कैबिनेट में जाने से रोक सकता है। सरोज के ऊपर लगे इन आरोपों के पीछे का राज यह है कि उनकी भाभी को इस बार दुर्ग से टिकट मिलने की बात चल रही थी। लेकिन ऐन टाइम पर उनकी जगह संघ से जुड़े विजय बघेल को टिकट दे दिया गया। जिस वजह से सरोज पांडे और उनकी भाभी ने अपने ही पार्टी के उम्मीदवार विजय बघेल के खिलाफ मोर्चा कोल दिया। यहां तक कि सोशल मीडिया पर खुलेआम भाजपा को वोट नहीं देकर कांग्रेस उम्मीदवार को वोट देने की अपील की गई, जिससे विजय बघेल के लिए कार्य कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं में बेहद नाराजगी रही।

रामविचार नेताम 
राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम ने इस बार छ्त्तीसगढ़ से लेकर झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी पार्टी का प्रचार किया। आदिवासी नेता नेताम की खासियत यह रही उन्होंने जिन जिन सीटों पर भाजपा का झंडा बुलंद किया, उन सभी सीटों पर पार्टी के उम्मीदवार जीते। उन्होंने मोदी के वाराणसी सीट पर भी कई दिनों तक प्रचार किया था। उन्हें इसका फल मिल सकता है। 

सबसे बड़ी बात है कि आदिवासी चेहरे की बात होगी तो निश्चय ही रामविचार नेताम से बड़ा और कोई नाम नहीं होगा। पांच बार विधायक रहे रामविचार नेताम प्रदेश में रमन कैबिनेट का भी हिस्सा रह चुके हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की टीम में उनको सचिव बनाकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है। सभी नवनिर्वाचित सांसदों के साथ नेताम भी दिल्ली में होने वाली एनडीए की बैठक में मौजूद हैं।

मोहन मंडावी
बस्तर संभाग कांकेर लोकसभा से संघ के चहेता मोहम मंडावी के नाम की भी चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह मंत्रिमंडल के लिए नये चेहरों की तलाश में हैं। खासकर अगर आदिवासी मुद्दों को ध्यान में रखा जाता है तो छत्तीसगढ़ से नये आदिवासी चेहरों में गोमति साय और मोहन मंडावी सबसे मजबूत दावेदार हैं।

गोमती साय
छत्तीसगढ़ की रायगढ़ सीट पर भाजपा की गोमती साय ने भी बेहतर वोटों के साथ कांग्रेस को मात दी है। उनके समर्थक उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने की मांग कर करे हैं। लेकिन उनके मंत्री पद के रास्ते में वर्तमान केंद्रीय राज्य मंत्री विष्णुदेव साय हैं। प्रदेश पार्टी में भीतर ही भीतर इन दोनों नेताओं के बीच की दूरियों की फुसफुसाहटें जोर पकड़ रही हैं। ऐसे में विष्णुदेव साय गोमती साय के रास्ते में बाधक बन सकते हैं। दूसरी बात कि विष्णुदेव के बाद इसी इलाके से फिर किसी सांसद को मंत्री बनाने पर पार्टी में विरोध हो सकता है। इसलिए, किसी और क्षेत्र के सांसदों को तरजीह दी जा सकती है।

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रमन सिंह
पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह के नामों की चर्चा भी प्रदेश में खूब हो रही है। लेकिन उन्होंने दिल्ली जाने से पहले ही स्पष्ट कर दिया कि केन्द्रीय नेतृत्व के लिए छत्तीसगढ़ से प्रतिनिधित्व का फैसला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही करेंगे।

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