संजीवनी टुडे

केमिकल मिले रंग-गुलाल से जा सकती है आंखों की रोशनी

संजीवनी टुडे 18-03-2019 18:32:34


लखनऊ। रंगों का त्यौहार होली उल्लास एवं उमंग का पर्व है। इस दिन लोग एक दूसरे को रंग व गुलाल लगाकर प्रेम और भाईचारे से रहने का संदेश देते हैं। वहीं जब रंगों की बात आए और वह भी आर्टिफिशियल (रासायनिक) तो सावधान रहिए। इनसे त्वचा को काफी नुकसान पहुंचता है और आखों की रोशनी भी जा सकती है। 

केजीएमयू के नेत्र विभाग के प्रो. अरूण कुमार शर्मा ने सोमवार को हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि केमिकल मिले रंग इतने खतरनाक होते हैं कि यदि यह रंग आंखों में पड़ जायें तो आंखों की रोशनी भी जा सकती है। वहीं, कुछ तरीकों को अपनाकर इन रंगों से बचा जा सकता है और आसानी से छुड़ाया जा सकता है। केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. सूर्यकान्त ने बताया कि होली में इस्तेमाल किया गया कृत्रिम रंग एलर्जी पीड़ित व्यक्तियों के लिए खतरा बन सकता है। आमतौर पर इस्तेमाल किया गया रसायन, हरे रंग के लिए तांबा, काले रंग के लिए नाइट्रेट ऑक्साइड और गुलाल में अभ्रक एलर्जिक रोगियों के लिए उत्प्रेरक का काम करते हैं। इसलिए एलर्जिक रोगियों को चाहिए कि वह रंग खेलने से बचें।

रंगों से एलर्जी है तो इन बातों का रखें ध्यान

त्वचा पर रंगों की एलर्जी को हल्के में न लें, क्योंकि इनकी अनदेखी किसी गंभीर बीमारी में भी तब्दील हो सकती है। एक्जिमा जैसे रोगों से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि बाहर जाने से पहले अपनी त्वचा और चेहरे पर तेल, पेट्रोलियम जेली या फेस क्रीम की मोटी परत लगाएं। अपने बालों में भी खूब सारा तेल लगा लें ताकि डाइ और रंगों में मौजूद हानिकारक पदार्थ आपके बालों और सिर की त्वचा से न चिपकें।

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-पूरी बाजू के कपड़े पहनें। शॉर्ट्स के बजाय पूरी लंबाई की पैन्ट पहनें, ताकि जहां तक हो सके आपकी त्वचा ढकी हुई रहे। 
-होली खेलने के बाद धूप में न बैठें। इससे त्वचा को और ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है। अगर आप घर के बाहर होली खेल रहें हैं, तब भी छाया में ही रहें। 
-अपने नाखूनों से रगड़ कर रंग को निकालने की कोशिश न करें। अपने शरीर और चेहरे के लिए ग्रेन्यूलर स्क्रब का इस्तेमाल करें।
-अच्छी क्वाॅलिटी के नेचुरल रंगों से ही होली खेलें जिससे त्वचा को रंगों का खामियाजा न भुगतना पड़ें।

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कैंसर जैसी घातक बीमारी का कारण बन सकता है नकली खोवा
केजीएमयू के मेडिकल गैस्ट्रोइन्ट्रोलोजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.अजय वरदान ने बताया कि नकली खोवा में यूरिया समेत साबुन के सारे प्रोडक्ट मिले होते हैं। उन्होंने बताया कि नकली खोवा खाने से व्यक्ति को उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इसके अलावा इसका सीधा असर लीवर और फेफड़ा पर पड़ता है। डाॅ. अजय ने बताया कि यदि नकली खोवा का सेवन चार से छह बार कर लिया जाय तो गुर्दा भी फेल हो सकता है। यहां तक कि नकली खोवा से कैंसर जैसी घातक बीमारी होने का भी खतरा रहता है। 
 

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