संजीवनी टुडे

बैंक ऑफ इंडिया के चेस्ट करेंसी से 4.25 करोड़ गबन की CBI करेगी जांच- योगी

संजीवनी टुडे 13-02-2020 17:37:25

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में बैंक ऑफ इंडिया की शाखा मेें करोड़ों के गबन मामले की जांच सीबीआई को स्थानांतरित करने का निर्णय किया है।


लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में बैंक ऑफ इंडिया की शाखा मेें करोड़ों के गबन मामले की जांच सीबीआई को स्थानांतरित करने का निर्णय किया है।  

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से गुरुवार को बताया गया कि मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार पर कठोर कार्यवाही करते हुए जिला प्रयागराज की बैंक ऑफ इंडिया, सुलेमसराय, धूमनगंज शाखा के करेंसी चेस्ट में पाए गए 4.25 करोड़ के गबन मामले की विवेचना सीबीआई को स्थानांतरित करने का फैसला किया है। यह मामला जुलाई 2019 में सामने आया था। 

बैंक प्रबंधक ने विभागीय जांच के बाद धूमनगंज थाने में चेस्ट करेंसी इंचार्ज समेत तीन के खिलाफ धूमनगंज थाने में धोखाधड़ी और गबन करने की एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया कि 03 जुलाई 2019 को बैंक की ऑडिट चल रहा था। इस दौरान करेंसी चेस्ट के आंतरिक परीक्षण के दौरान 4.25 करोड़ की अनियमितता पाई गई। बैंक प्रबंधक ने तत्कालीन चेस्ट अधिकारी वशिष्ठ कुमार राम से पूछताछ की। पहले आरोपित बैंक कर्मी ने कहा कि करोड़ों रुपये ग्रामीण बैंक को दिए गए और वहां से भुगतान नहीं हुआ।

बैंक प्रबंधक ने उनका लिखित बयान दर्ज किया। इसमें आरोपित बैंककर्मी वशिष्ठ कुमार राम ने पहले गोलमोल जवाब दिया और ग्रामीण बैंक के नाम का खुलासा नहीं किया। बाद में बताया कि उसने एसके मिश्र नाम के व्यापारी और उसके बेटे संजू मिश्र को करोड़ों रुपये उधार दिए हैं। बदले में उनसे ब्याज ले रहा था। इस सनसनीखेज खुलासे से बैंक अफसर भी दंग रह गए। इस धोखाधड़ी की जानकारी होने के बाद बैंक प्रबंधक विवेक गुप्ता ने मामले में व्यापारी पिता-पुत्र और बैंककर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी। 

हालांकि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से आरोपित बैंककर्मी वशिष्ठ कुमार राम गायब हो गया था। पुलिस महीनों तलाश में लगी रही लेकिन उसका पता नहीं चल सका। बाद में उसके आत्मसपर्मण करने के बाद पुलिस ने रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ की, जिसमें वह खुद पर लगे सभी आरोपों से मुकर गया। 

पुलिस उसे लेकर उसके गुलटेरिया अपार्टमेंट स्थित फ्लैट पर भी गई लेकिन वहां भी कुछ हासिल नहीं हुआ। वहीं पुलिस दो अन्य आरोपितों के बारे में भी जानकारी नहीं जुटा सकी। इसके अलावा इतने बड़े गबन के बाद रकम का क्या किया गया, इसका भी पुलिस कुछ पता नहीं लगा पायी। उसने बैंक प्रशासन पर ही जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। अब सीबीआई मामले की तह तक जायेगी।

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